लम्बे समय से छूटी कविताओं तक पुनः लौटते हुए... या यूँ कहें... लम्बे समय बाद कवितायेँ हम तक लौटती हुईं... ये ऐसे ही लिखा था... शायद पहली पोस्ट यही होती... पिछली फ़रवरी के बाद की... शायद से पुनः शुरू हुआ सफ़र देखें कब तक कहाँ तक चलता है... कविता के आँगन में होने के इस आशान्वित एहसास को भी सहेज लें आज यहाँ...
छूट गए शब्द, खो गयी कविता
हम भी नहीं रहे हम...
समय जाने कितना बीत गया
कितना बीत गए हम...
ये पन्ने फिर भी पहचान लेंगे
आँखें अब भी तो हैं नम...
जुड़ जाने के बाद
प्रगाढ़ता कभी नहीं होती कम...
आशीषों का हाथ सर पर
हर लेगा सारे तम...
कविता की सन्निधि में
फिर से होंगे, कविता के आँगन में हम...!!
3 टिप्पणियाँ:
bahut hi sundar panktiyan
बहुत सुन्दर सार्थक सृजन, बधाई
बहुत सुन्दर सार्थक सृजन, बधाई
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