होता है .. मन से कई बार बाहर नहीं आ पाती कविता ...बहुत खूब ...
हम उम्मीद पालते हैं, उम्मीदों को समझते नहीं …
बहुत दिनों बाद आपकी सी कविता पढ़कर अच्छा लग रहा है
Welcome back likhati rahiye man ke bhav behte rahenge
लंबे समय बाद अनुशील के पट खुलना सुखद लग रहा है...बिल्कूल सही लिखा अनु....उम्मीद परिवर्तन की परछाई होती है....अब कविता सिरहाने आकर फिर बैठेगी...फिर लय में शब्द गुथ जायेंगे..कलम एकाकार हो चल पड़ेगी...ये हमलोगों की उम्मीदें है...
Sahi bat..
मैंने अनुपमा के आने के आहट भी सुन ली और उसकी कविता भी .....दोनों ही दिल को सुकून देती हैं ....स्वस्थ रहें ......
दस्तक हुई .. दरवाज़ा खुला .. !"सब कुशल मंगल न ?"
सौरभ जी, प्रणाम! सब कुशल है आपके आशीर्वाद से...!
प्रणाम अशोक जी, आपका आशीर्वाद बना रहे हमेशा...!
बहुत सही लिखा है आपने...आप सच में बहुत दिन बाद दिखी, पर बहुत सुखद पुनरागमन हुआ आपका...|सुन्दर कविता...
आपको दोबारा देख कर अच्छा लगा... :)
12 टिप्पणियाँ:
होता है .. मन से कई बार बाहर नहीं आ पाती कविता ...
बहुत खूब ...
हम उम्मीद पालते हैं, उम्मीदों को समझते नहीं …
बहुत दिनों बाद आपकी सी कविता पढ़कर अच्छा लग रहा है
Welcome back likhati rahiye man ke bhav behte rahenge
लंबे समय बाद अनुशील के पट खुलना सुखद लग रहा है...बिल्कूल सही लिखा अनु....उम्मीद परिवर्तन की परछाई होती है....अब कविता सिरहाने आकर फिर बैठेगी...फिर लय में शब्द गुथ जायेंगे..कलम एकाकार हो चल पड़ेगी...ये हमलोगों की उम्मीदें है...
Sahi bat..
मैंने अनुपमा के आने के आहट भी सुन ली और उसकी कविता भी .....दोनों ही दिल को सुकून देती हैं ....
स्वस्थ रहें ......
दस्तक हुई .. दरवाज़ा खुला .. !
"सब कुशल मंगल न ?"
सौरभ जी, प्रणाम! सब कुशल है आपके आशीर्वाद से...!
प्रणाम अशोक जी, आपका आशीर्वाद बना रहे हमेशा...!
बहुत सही लिखा है आपने...आप सच में बहुत दिन बाद दिखी, पर बहुत सुखद पुनरागमन हुआ आपका...|
सुन्दर कविता...
आपको दोबारा देख कर अच्छा लगा... :)
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