अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

अनकहा सा कुछ

जो कहे जाने से रह गयीं
वे बातें अनमोल हैं   


अनकही रहीं
बचा रहा उनका आत्मिक स्पंदन 


उच्चरित होते ही शायद
गुम जाता अर्थ
कहीं कोलाहल में !


ठीक ही है
बहुत कुछ अनकहा रहना
आखर-आखर भावों को तहना 


कि किसी रोज़ मिलेंगे बिछड़े हुए रस्ते 

हो जायेगा सब अभिव्यक्त फिर आँखों के खारे जल में !
















इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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