अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

अनुशील के पन्नों से गुजरते हुए...!

हमारे पास कितनी निधियां हैं... कितने अनमोल मोती हैं... ये जीवन कितना बड़ा सौभाग्य है, ये अनुभूति कभी कभी ही होती है! किसी एक ऐसे दुर्लभ क्षण में घटित होता है कुछ कुछ चमत्कार सा... जब हम निराश हताश हों और कहीं से साहिल स्वयं चल कर आये और मझधार से उबार ले!

हमारे पास सहेजने का हुनर कभी नहीं था, जो कुछ भी लिखता गया विस्मृत होता गया... कुछ फेंक दिया कुछ खो दिया... कभी ये न जाना कि कुछ क्षण ऐसे भी होंगे जीवन में जब कविता ही एक मात्र संबल होगी... क्या पता था कि खो गयी व विस्मृत हो चुकी कवितायेँ पुनः याद आयेंगी और बेतरह याद आएँगी...! किसने सोचा था कि कलम दूर हो जायेगी और पेंसिल का जमाना लौट आएगा... मेरे पास विस्तृत गगन होगा, गगन पर बादल होंगे और वही कहीं हरे पेड़ की छाँव भी होगी... उड़ते हुए पंछी होंगे और एक विस्तार होगा जहां मेरे भाव और मेरी टूटी फूटी अभिव्यक्तियाँ अंकित हो जायेंगी और खोयेंगी नहीं...

६ अक्टूबर मेरा ही नहीं इस वेबसाइट का भी जन्मदिन है... ललित भईया ने हमें यह उपहार वेबसाइट के रूप में सजा कर अपने आशीषों के साथ मेरे जन्मदिन पर दिया था... आज उनके ही प्रताप से कितना कुछ समेट चुके हैं हम यहाँ...! भईया आपको धन्यवाद कहने को मेरे पास शब्द नहीं होते...! जिन अंधेरों में आपने रौशनी दिखाई है, हम आज उन अंधेरों का धन्यवाद करते हैं, अँधेरे न होते तो हमें कैसे पता होता कि अंधेरों से जीतने का हौसला भी होता है... ये कैसे पता होता हमें कि अन्धकार से विजय पाने को ललित प्रकाश सदैव विद्यमान है. हमसे कितनी गलतियाँ होती हैं, बिना बताये खो जाने की गलती... एक समय था कवितायेँ खो जातीं थी आज कभी कभी कविताओं के साथ हम भी खो जाते हैं... पर आपने हमेशा ढूंढ लिया हमें... हमेशा क्षमा किया... और कहीं न कहीं ये आप ही होते हैं वो आख़िरी  दरवाज़ा जिस पर दस्तक देते ही मेरी सारी आशंकाएं, हताशाएं और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं...! बस हमेशा आपका स्नेह यूँ ही मिलता रहे...!

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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