आने वाले कल के लिए
ये
अनिश्चित-से
काश और शायद सरीखे शब्दों की ही महिमा है
कि हम चलते चले जाते हैं
उन मोड़ों से भी आगे
जहाँ से आगे की कोई राह नहीं दिखती
ये शब्द सम्भावनाओं का वो आकाश हैं
जो घिरे हुए बादलों के बीच भी
चमक उठते हैं
अपनी रौ में!
एक आशा है
जो जिलाए रखती है
अंधकार के घोर प्रपात में
हम दामन में
एक मुस्कान बचाए रखते हैं
तब भी जब कुछ भी नहीं होता अपने हाथ में
मन की चंचलता
उठते-गिरते
अपने लिये
मन-भर आकाश गढ़ लेती है
जिसमें
नए सिरे से
सूरज चाँद टाँक
समय की गति के गूढ़ार्थ पढ़ लेती है!
लिखना आश्वस्ति है!
कुछ तो बात होगी
कि अपनी बेचैनियों का हल
हम कविताओं में जीते हैं
घूँट-घूँट
आँसू
आँखों से रीते हैं!
लिख लेना
कितनी ही बार
अपने आप में ही हल होता है
कई बार हम
लिखते हुए
अंधकार से जीते हैं!
चलते हुए
समाधान
राहों में उग आते हैं
चलती कलम की
स्याही से हम
अपना बिखरा मन सीते है!
एक भाषा है
जिसमें हम ख़ुद से बात करते है
उसकी लिपि बताती है
हम
कितना बचे हैं
और कितना बीते हैं!
सुख है!
इतना वृहद है दुःख
इतने सारे हैं दुःख
कि अपना दुःख बहुत छोटा हो जाता है
दुःख रचा नियति ने
तो दुःख को आसमान-सा ऐसा विस्तार दिया
कि ये सबके हिस्से आया
जैसे सबका अपना-अपना आसमान
वैसे सबके अपने-अपने दुःख
इस वृहदता में
अपने दुःख की लघुता महसूस कर
रोना-कलपना त्याग
जीवन जीने में जुट जाना ही सुख है
कि
सुख का
अलग से कहीं कोई अस्तित्व नहीं
दुःख में साथ मुस्कुराना ही सुख है!
आभास
दर्द
दामन
हौसला
दुआ--
अभी-अभी
यहाँ से होकर
गुज़री है ज़िन्दगी!
सूनापन
विरक्ति
संशय
समाधान--
अभी-अभी
इस ठौर
ठहरी है ज़िन्दगी!
प्रार्थनाएँ
ठोकरें
ठेस
अट्टहास--
कुछ नहीं सुनती
अपनी धुन में चली जाती है
बहरी है ज़िन्दगी?!
आह
डूबता रहा मन
भींगता रहा मन
हर बार
बार-बार
ज़िन्दगी की थाह में!
यूँ ही
उठते-गिरते चलते रहे हम
कभी मुस्कान लिए आँखों में
कभी लिए हुए आँखें नम
पथरीली जीवन राह में!
रिश्ते
और रास्तों के
सारे समीकरण
सिमट आये
अपनी एक कराह में!
टूटन का सौंदर्य
