अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

कहो कैसा रहेगा...!

लगता है
ये उदासियों का
मौसम है...
मौसम ही है
तो ज़रूर
बदलेगा


तू तो
स्वयं ही
सूरज है...
बादलों से
तत्क्षण
निकलेगा


मन
मेरा भी
उदास है
पर
ये तो सामान्य सी बात है
चलेगा


पर
मन बड़ा बेचैन
हो जाएगा
जीवन से भरा हुआ जीवन ही अगर
उदासी की
बात करेगा


अपनी
सारी उदासी
यहाँ भेज दो
ये
एकदम से
ठीक रहेगा


या फिर
अपनी उदासी साथ लेकर
यहाँ चले आओ
हम दोनों मिल कर
सारी उदासी से निपट लेंगे...
कहो कैसा रहेगा!

2 टिप्पणियाँ:

dj 30 अप्रैल 2015 को 6:32 pm  

बढ़िया आदरणीया अनु जी

Anita 1 मई 2015 को 12:09 pm  

वाह.. एक से दो भले..

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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