थमा हुआ प्रवाह














दृश्य थम जाते हैं 


जल का ठोस हो जाना
गति को
पुनः परिभाषित करता है 


कि
बर्फ़ीली सतह के नीचे भी
जीवन पूर्ववत साँस ले रहा होता है. 


सागर का विस्तार है
लहरें नहीं हैं 


लहरों का शोर नहीं है 


जीवन है. 






प्रकृति

समंदर की
करुणा
नयनों में वाष्पित


कोहरे में
ठिठुरती प्रकृति के अंक में
जीवन की ऊष्मा परिलक्षित


सब खेल विधाता के
अपने आप में दक्ष


प्रगट कर देते हैं हमें
हमारे ही समक्ष !!

सूरज

डूबते हुए भी
खिल रहा था 


वो डूबते हुए भी सूरज ही था
तो क्या हुआ जो
अंधेरों से मिल रहा था

जीवन रमा रहे

हर क्षण नया हो
छोटी-छोटी खुशियों का आकाश वृहद हो
तारीखें 

सुखद यादों का ताना-बाना बुनती हुई 

विदा लें
जीवन रमा रहे.


[[ मंगलकामनाएं ]]


[[ And, thus dawned 2018 ]]

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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