रे मन चल उदयन की ठौर
हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (08-04-2015) को "सहमा हुआ समाज" { चर्चा - 1941 } पर भी होगी!--सादर...!डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
चलता तो रहता है जीवन। किन्तु केवल जिंदा रहने का नाम ही जीवन नहीं होता। क्यूंकी ज़िंदगी जीने का नाम है काटने का नहीं।
5 टिप्पणियाँ:
रे मन चल उदयन की ठौर
हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (08-04-2015) को "सहमा हुआ समाज" { चर्चा - 1941 } पर भी होगी!
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
चलता तो रहता है जीवन। किन्तु केवल जिंदा रहने का नाम ही जीवन नहीं होता। क्यूंकी ज़िंदगी जीने का नाम है काटने का नहीं।
चलता तो रहता है जीवन। किन्तु केवल जिंदा रहने का नाम ही जीवन नहीं होता। क्यूंकी ज़िंदगी जीने का नाम है काटने का नहीं।
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