एक पावन
एहसास से
बंध कर
जी लेते हैं!
मिले
जो भी गम
सहर्ष
पी लेते हैं!
क्यूंकि-
प्रेम
देता है
वो शक्ति
जो-
पर्वत सी
पीर को..
रजकण
बता देती है!
जीवन की
दुर्गम राहों को..
सुगम
बना देती है!
बस यह प्रेम
अक्षुण्ण रहे
प्रार्थना में
कह लेते हैं!
भावनाओं के
गगन पर
बादलों संग
बह लेते हैं!
क्यूंकि-
प्रेम देता है
वो निश्छल ऊँचाई
जो-
विस्तार को
अपने आँचल का..
श्रृंगार
बता देती है!
जिस गुलशन में
ठहर जाये
सुख का संसार
बसा देती है!
प्रेम अक्षुण्ण रहे!
जिन्हें अस्तित्व में आना है...
जिन्हें अस्तित्व में आना है
वे रचनाएँ
स्वतः
रच जायेंगी!
भाव
अंतस में सृजित होगा
और कलम की नोक पर
उसकी स्मृतियाँ झिलमिलायेंगी!
जिनको आगे बढ़ना है
दुर्गम राहें
उनके हौसलों को
डिगा नहीं पायेंगी!
खुद
हट जायेंगे कांटे
और इच्छा शक्ति के बल पर
राहें जगमगायेंगी!
जिन्हें खुद पर है विश्वास
उनके सम्मुख
विपत्तियाँ
शीश नवायेंगी!
देख
मस्ती में मस्तानो को
दुःख दर्द की शामें
विदा हो जायेंगी!
जिन्हें अस्तित्व में आना है
वे रचनाएँ
स्वतः
रच जायेंगी!
भाव
अंतस में सृजित होगा
और कलम की नोक पर
उसकी स्मृतियाँ झिलमिलायेंगी!
