नीर नयनों में भर आये... !!

नीर
नयनों में भर आये...
दीप जब
बुझने को आये...


कितने कितने बीते क्षण
गूँज उठे...
यादों के
कितने विम्ब छलछलाये...


अपने आयुष्य भर
जलता है...
फिर यादों में
रह जाता है...


लौ को
धारण करने वाली काया का
प्रस्थान निश्चित...
समय की धारा में
सब बह जाता है...


क्षणभंगुरता की महिमा के
शाश्वत कुछ अंश झिलमिलाये...
नीर
नयनों में भर आये... !!

3 टिप्पणियाँ:

Archana Chaoji 7 नवंबर 2015 को 4:23 pm बजे  

... मन भर आया ...

रश्मि शर्मा 7 नवंबर 2015 को 7:40 pm बजे  

Bahut sundar..man ko chhu gayi kavita

Rishabh Shukla 8 नवंबर 2015 को 7:24 am बजे  

सुन्दर रचना .........

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
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आज कैसे
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