अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

अँधेरी रात में वो भोर हो लेता है... !!

प्रारब्ध ने
जो तय कर रखा है...
वो टलेगा नहीं...

पर ये कहाँ लिखा है
कि टूट गया
तो सपना फिर पलेगा नहीं...


सब कुछ खो कर भी
पुनः शून्य से प्रारंभ करने की
क्षमता रखता है जीवन...


कितने गूढ़ रहस्य समाये हुए है सृष्टि...
कितनी प्रगल्भता लिए हुए
निर्मित है मानव मन...


टूट बिखर जाने के बाद
पूरी सिद्दत से
खुद को बटोर लेता है...


मन की अद्भुत क्षमता है
अँधेरी रात में वो
भोर हो लेता है...


तो जितनी बार टूटेगा
उतनी ही बार संवरेगा...


खोता सा लगेगा हर सहारा
फिर दुगुने वेग से
वही विश्वास बन उभरेगा... !!



2 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... 10 नवंबर 2015 को 4:21 am  

एक नई शुरुआत हमेशा होती है

Onkar 10 नवंबर 2015 को 4:45 pm  

बेहतरीन प्रस्तुति,

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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