अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

नमी के अनगिन टुकड़े और हम... !!

आधी रात के बीत जाने पर
सुबह से कुछ दूर
एक पहर ठिठका खड़ा था...


टप टप बूंदों की झड़ी लगी थी...
वो उसमें भींग रहा था...


खिड़की से
एक जोड़ी आँखों ने
बीतता हुआ एक अध्याय देखा...
नीरव अन्धकार के पार
बजते बूंदों के संगीत में
जीवन का पर्याय देखा...


अकेले क्यूँ भींगता वो पहर...
साथ हो लिए...
नमी के अनगिन टुकड़ों को आत्मसात कर...
उस अँधेरे में हम प्रात हो लिए... !!


 

2 टिप्पणियाँ:

yashoda Agrawal 8 नवंबर 2015 को 2:38 am  

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 09 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Nitish Tiwary 8 नवंबर 2015 को 8:44 am  

sundar aur bhaawpoorn prastuti.
http://iwillrocknow.blogspot.in/

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