अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

सात वर्ष हुए, हमने शुरू किया था साथ चलना... !!

वैसे ये
बहुत पहले की
बात नहीं है
पर
अब लगता है
एक युग बीत गया है...


अनेकानेक
पलों को
संग जीते हुए भी
लगता है जैसे
हर क्षण
संगीत नया है...


कोई भी इम्तहान हो
कैसा भी जीवन का
घमाशान हो
जीत लेंगे हर मुश्किल
कि हमारे सारे सपने साझे हैं
और तुम्हारी आँखों में असीम करुणा धैर्य प्रीत दया है...


साथ रहे बस
तो शून्य से शुरू कर भी
नाप लेंगे क्षितिज
क्या हुआ जो
भरा हुआ पात्र हमारा
बूँद दर बूँद रीत गया है...


यात्रारत है जीवन
पूरी दुनिया
देखनी है संग
सपनों का ये मनभावन रंग
अभी अभी देखो
सभी अंधेरों से जीत गया है...


तो चलें...
लग जाएँ दौड़ती हुई राहों के गले... !!


9 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... 25 नवंबर 2015 को 6:46 am  

सात साल सात फेरों की तरह
जीवन के हर रंग को साक्षी मानते हुए
आज खुश से हमारे साथ हैं

बहुत प्यार,आशीष

Anita 25 नवंबर 2015 को 7:02 am  

बहुत बहुत शुभकामनायें इस खूबसूरत सफर के लिए..

Kavita Rawat 25 नवंबर 2015 को 8:00 am  

प्यार में दिन कैसे निकल जाते हैं पता नहीं चलता। …
वैवाहिक वर्षगांठ की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

Rahul... 25 नवंबर 2015 को 10:11 am  

shubhkaamnaayen................

Dilbag Virk 25 नवंबर 2015 को 2:56 pm  

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 27-11-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2172 में दिया जाएगा
धन्यवाद

ब्लॉ.ललित शर्मा 26 नवंबर 2015 को 3:06 am  

वैवाहिक वर्षगांठ की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

Asha Joglekar 26 नवंबर 2015 को 3:17 am  

सात सालों की तरह सत्तर साल गुजर जायें आपके साथ को । बहुत शुभकामनाएं।

सुशील कुमार जोशी 26 नवंबर 2015 को 4:11 am  

शुभकामनाऐं !

अनुपमा पाठक 26 नवंबर 2015 को 8:59 am  

Thanks @ all for all the wishes!!

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
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कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
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