आत्मसंवाद... ?!!

सही गलत
अच्छा बुरा
सत्य असत्य
उचित अनुचित


ये निर्णय ही दुष्कर है...
और शायद ऐसा कोई तर्क-वितर्क...
ऐसा कोई निर्णय
अनिवार्य भी नहीं...


कि संयत मन हो...
उसके दिशानिर्देश पर चलने का उपक्रम हो...


तो राहें खुल जाती हैं...
दुनिया का काम है वो रोड़े अटकाती है 


तो ये कभी भी किसी सूरत में
हताशा का कारण न हो...
कि ऐसी कोई उलझन नहीं जहां में
जिसका कोई निवारण न हो...


ऐसे क्षण आयेंगे जब टूटा सा होगा विश्वास
देखना, कविता फिर भी होगी पास 


वही गुनगुनायेगी...
दीप नए जलाएगी... !!

5 टिप्पणियाँ:

कौशल लाल 31 अक्टूबर 2015 को 4:16 am बजे  

बहुत सुंदर ......

Onkar 31 अक्टूबर 2015 को 5:40 am बजे  

बहुत सुंदर

रश्मि प्रभा... 31 अक्टूबर 2015 को 6:47 am बजे  

आत्मसंवाद तभी होता है
जब अर्जुन गांडीव नीचे रख देता है …
कृष्ण का रूप धर आत्मा
दिशा निर्देशेित करती है
जहाँ कोई तर्क नहीं, बस आगत को पाने का उपक्रम होता है

जमशेद आज़मी 1 नवंबर 2015 को 8:07 am बजे  

बहुत ही सुंदर रचना की प्रस्‍तुति।

Himkar Shyam 1 नवंबर 2015 को 12:38 pm बजे  

सुन्दर और भावपूर्ण

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
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मेरे आँगन में...
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