अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

स्मृतियों के नाम... !!

तारीखें लौटती हैं...
पर वो बीता पल नहीं लौटता... ! 


लम्हा जो बीत गया


वो,
बस स्मृतियों में,
बच जाता है... 


प्रत्यक्ष-प्रमाण से परे 


मन की हथेली पर,
मेहंदी-सा,
रच जाता है... 


जो लौटे कभी,
तो फिर से,
जी लेंगे... 


लम्हों के धागे से,
तार-तार दामन,
सी लेंगे...


तब तक... चल रहे हैं,
हम बाती-सा... जल रहे हैं... !! 


सुना है...


ज़िन्दगी
अंतिम क्षण तक
आस है... 


मौत के इस पार और उस पार भी
केवल और केवल
जीवन का ही वास है...


उसी जीवन पर
आस्था रख
बिना
साँसों का हिसाब किये
हम पल पल
जिए जाते हैं... 


हर बीतते लम्हे को
स्मृतियों के
नाम किये जाते हैं... ...... ... !!




6 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... 1 अक्तूबर 2015 को 11:34 am  

उम्मीद इतनी कि स्मृतियाँ हथेलियों को थाम लेती हैं
और अकेले में भी ज़िन्दगी गुजर जाती है …

राजेंद्र कुमार 1 अक्तूबर 2015 को 1:04 pm  

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (02.10.2015) को "दूसरों की खुशी में खुश होना "(चर्चा अंक-2116) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

अजय कुमार झा 1 अक्तूबर 2015 को 3:11 pm  

सच गुजरा हुआ वक्त नहीं लौटता ..स्मृतियाँ ही शेष रह जाती हैं

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 2 अक्तूबर 2015 को 2:31 pm  

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (03-10-2015) को "तलाश आम आदमी की" (चर्चा अंक-2117) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kailash Sharma 3 अक्तूबर 2015 को 11:22 am  

बीते समय का अवशेष केवल स्मृतियाँ ही हैं...उत्कृष्ट अभिव्यक्ति...

Mukesh Kumar Sinha 5 अक्तूबर 2015 को 3:41 pm  

बीती बातें याद बन जाती है .....

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