अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

एक मौसम ये भी... !!

एक मौसम ये भी...


पत्ते,
गिरते हुए,
हो गए फूलों से...


सहर्ष स्वीकारा मुरझाना,
फूलों ने भी... !!


भले
कितनी ही हों मुश्किलों,
आस गीत न गा सके...


जीवन
इतना बेबस नहीं कभी... !!

उदासी में भी,
उजास है,
विदाई नहीं मात्र संत्रास है...

खिली हुई हों पत्तियां भी...
एक मौसम ये भी... !!









2 टिप्पणियाँ:

Kaushal Lal 26 अक्तूबर 2015 को 5:12 pm  

सुन्दर .....

रचना दीक्षित 27 अक्तूबर 2015 को 10:26 am  

मौसम भी बदलेगा कभी न कभी. सुंदर प्रस्तुति.

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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