अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

क्या होगा तब... ?


एक फूल के मुरझाने से
न ही वीरान होता है गमला
न ही हम उदास होते हैं...


ये एक सहज प्रक्रिया जो है... ! 


मगर
क्या होगा... ?
गर असमय  ही 


फूलों संग
पूरा गमला  मुरझा जाए तो...


लूट गयी खुशबू
फिर लौट न पाए तो...


बीच से उठकर कहीं लुप्त हो गया जीवन
जो फिर कभी न खिलखिलाए तो...


हम बेतहाशा भागते हुए
एक दिन अपनी सहज चाल ही भूल जायें तो...


क्या होगा तब...
सोचें तो अब...
एक क्षण का विराम ले कविता में ही होवें सब... !!!






1 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... 17 अक्तूबर 2015 को 7:27 pm  

रुक जाता है वक़्त
आँसुओं से सींचता है गमले को
अथक निरंतर
तब तक स्वयं न मुरझा जाए

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ