अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

जाने कब आ जाये अगला मोड़... !!

अगर रुकते तुम तो
कुछ पल स्पंदित हो लेता
ये निर्जन उदास मोड़...


रास्ते मुड़ जाते हैं यहाँ से
मन का कोई अनाम
गहरा नाता जोड़... 


मोड़ यह
निर्विकार खड़ा रहता है
इसे नहीं कहीं पहुँचने की होड़...


राही बढ़ जाते हैं
अपनी धुन में मस्त
नेह मोह के सब धागे तोड़... 


मोड़ की तठस्थता
मोड़ का मौन
जो अपनाये ये अलंकरण
हममें से वो होगा कौन... ?? 


हो सके तो
इसी क्षण
उस-सा होने का
प्रयास रहे जी तोड़...


ज़िन्दगी की रफ़्तार तेज़ है
विदा का सन्देश लिए
जाने कब आ जाये
अगला मोड़... !!

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ