अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

बारिश, फिर आना... !!











बूंदों की छम छम
एक छतरी और एक हम

जीवन की सरगम
धरा पर बूंदों का आगमन

जीने के लिए ज़रूरी हैं कुछ भरम
हर सुख दुःख में होती रहे आँखें नम

बस हरदम ये बात रहे...
बारिश हो न हो... छतरी हो न हो...

जीवन रहते... जीवन का सदा साथ रहे... !!

*** *** ***
यहाँ इतनी बारिश कभी नहीं हुआ करती थी... इस बार खूब हुई... और हम निकले भी भींगने... छतरी के साथ... और छतरी के बिना भी... 
बारिश, फिर आना... इस बार बर्फ़ के फ़ाहों का रूप धर कर जल्द ही... 

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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