कि यात्राओं की अपनी महिमा है

उस शहर भींगते हुए
भींगते शहर को देखा था 


बारिश साथ थी
बूँदों का सान्निध्य था 


ज़िंदगी
नमी को भीतर सींचती
नमी को जीती


एक सरल रेखा थी


कि 

यात्राओं की अपनी महिमा है 

कि 

रास्ते सीखाते हैं हमें
तमाम विकटताओं के बीच सहज होने का पाठ
रास्तों को जी कर ही आत्मसात होती है
गति की अपरिहार्यता !



[ ओसलो, २०१७ जून ]





2 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 11 जून 2019 को 11:41 am बजे  

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-06-2019) को "इंसानियत का रंग " (चर्चा अंक- 3364) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

वाणी गीत 14 जून 2019 को 10:49 am बजे  

यात्राएं सिखाती हैं जीवन की राह..।
खूबसूरत बात!

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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