छतरी का आस्माँ हो जाना

बारिश और छतरी का भी
कैसा अद्भुत नाता है


जब बरसता है अम्बर
तो छतरी
हमारा आसमान हो जाती है


ऐसे ही
कुछ एहसास छतरी बनकर
जीवन में हमें
तेज़ बारिश और तपती धूप से बचाएँ !


कभी हम भी तो
किसी के टुकड़े भर ज़मीं के लिए
हौसलों का आसमान हो जाएँ !!

6 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 11 जून 2019 को 11:44 am बजे  

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-06-2019) को "इंसानियत का रंग " (चर्चा अंक- 3364) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Pammi singh'tripti' 11 जून 2019 को 5:40 pm बजे  



जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना 11 जून 2019 के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

अनीता सैनी 12 जून 2019 को 5:23 am बजे  

कभी हम भी तो
किसी के टुकड़े भर ज़मीं के लिए
हौसलों का आसमान हो जाएँ !!...बेहतरीन सृजन प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी 12 जून 2019 को 5:23 am बजे  

कभी हम भी तो
किसी के टुकड़े भर ज़मीं के लिए
हौसलों का आसमान हो जाएँ !!...बेहतरीन सृजन प्रिय सखी
सादर

Anita 12 जून 2019 को 5:32 am बजे  

वाह !

मन की वीणा 12 जून 2019 को 9:10 am बजे  

बहुत ही सार्थक हृदय का मंथन करती रचना।
अप्रतिम।

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