उनकी सूक्ष्म आपसी समझ को प्रणाम

बाती के संघर्ष को
अस्ताचलगामी सूर्य
प्रणाम करता है 


अपने सारे उत्तरदायित्व
नन्हें दीप को सौंप
वह आश्वस्त हो प्रस्थान करता है


अकथ पीड़ा प्रकाशपूँज की
नन्हा दीप समझता है


अपनी शक्ति भर जलता हुआ 

आँधियों के ख़ौफ़ पर विहँसता है 


कि
संघर्ष की जीत से
नहीं प्रकृति को भी इंकार है 


दीप और सूर्य के
परस्पर कर्तव्य निर्वहन पर ही
टिका सृष्टि का विस्तार है 

1 टिप्पणियाँ:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर 14 जून 2019 को 9:24 am बजे  

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जाँबाज मनोज तलवार को सादर नमन : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
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