निष्ठा

हवा के वेग से
लड़ता नहीं


बस,
जलता है


बाती का संघर्ष
सतत चलता है!

1 टिप्पणियाँ:

Onkar 1 जून 2019 को 4:56 am बजे  

वाह,बहुत खूब

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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