संकल्पों का प्रताप

दुरूह यात्राओं को
सहजता से, तय करना ही
सिफ़त होगी


यह तो तय है
ज़िन्दगी हर क्षण, एक नयी
आफ़त होगी


हमारे संकल्पों के बल पर ही
उम्मीद का सूरज निकलेगा
कभी तो सूकूँ मिलेगा
राहत होगी 

5 टिप्पणियाँ:

Onkar 16 जून 2019 को 6:23 am बजे  

बहुत खूब

Anita 16 जून 2019 को 7:22 am बजे  

यह भी तो तय है कि
जिंदगी हर कदम पर एक नई उल्फत होगी...
उससे ऑंखें मिलाने का हौसला जो रखते हैं,
वह हर कदम पर उसके प्यार में आगे बढ़ते हैं

Kamini Sinha 16 जून 2019 को 10:04 am बजे  

बहुत ही सुंदर रचना...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 16 जून 2019 को 4:23 pm बजे  

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (17-06-2019) को "पितृत्व की छाँव" (चर्चा अंक- 3369) (चर्चा अंक- 3362) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
पिता दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी 17 जून 2019 को 4:52 am बजे  

बहुत ही सुन्दर रचना
सादर

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