आसमान देखते हुए

आसमान देखते हुए
कितना कुछ उमड़ता-घुमड़ता है


बादलों की चित्रकारी
अनायास
मन में उतर आती है


सिमटा हुआ मन
फिर आसमान हो जाता है


कोई-कोई क्षण
अपने बीतने में
कभी-कभी
कितना
महान हो जाता है


कि
उस एक क्षण की स्मृति में
ज़िन्दगी बिताई जा सकती है!


ऐसे ही क्षणों से
समृद्ध जीवन हो


देख लेना आसमान बस
जो कभी अपने भीतर झाँकने का मन हो!

1 टिप्पणियाँ:

Anita 24 जून 2019 को 5:32 am बजे  

यह गीत याद आ गया आपकी रचना पढ़कर..हर कोई चाहता है इक मुठ्ठी आसमान...

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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