मौन की परिधि तक का दुर्लभ सफ़र

मौन की महिमा
अपार है
जो यह भाषा आत्मसात कर ली जाए
तो कहती भी है
सुनी भी जाती है 


अपने सबसे प्रभावी रूप में!


मगर
वाचालता के हम इतने आदी हैं
कि मौन की परिधि तक
पहुँच ही नहीं पाते 


कि
उस देहरी तक पहुँचने की
अपनी नैतिक साँकल्पिक अहर्ताएँ हैं।

1 टिप्पणियाँ:

Anita 5 जून 2019 को 7:32 am बजे  

मौन की देहरी तक जो पहुँच गया वह जाग गया..

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
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"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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