जिंदगी ही लक्ष्य है और जिंदगी ही उसे पाने का साधन..जीना ही अपने आप में पूर्ण है..इस तरह देखें तो मुक्ति भी यहीं है और बंधन भी खुद ही बनाये हैं, आखिर कुछ तो करना है न..
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जिंदगी ही लक्ष्य है और जिंदगी ही उसे पाने का साधन..जीना ही अपने आप में पूर्ण है..इस तरह देखें तो मुक्ति भी यहीं है और बंधन भी खुद ही बनाये हैं, आखिर कुछ तो करना है न..
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