अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

ये रिश्ता पुराना है... !!

ये रिश्ता
पुराना है...
आँखों में
बूंदों का
तराना है...


जब तब
बरसती हैं...
आँखें
हर मौसम में
ज़रा सी धूप को तरसती हैं...


ये यूँ ही चलने वाला
सिलसिला है...
ज़िन्दगी को
विधाता से मानों
नमी का वरदान मिला है...


बूंदों में
आशा है...
सात रंगों की
भोली सी
जिज्ञासा है...


यही जिज्ञासा
जिलाए रखती है...
हर मोड़ से गुजरती हुई ज़िन्दगी
भले  कितनी ही
हताश दिखती है... !!

1 टिप्पणियाँ:

Anupama Tripathi 12 सितंबर 2015 को 4:23 pm  

उज्जवल जिजीविषा से परिपूर्ण !!बहुत सुंदर !!

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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