इतना खाली खाली लग रहा था... इतना अँधेरा था... अँधेरा तो अभी भी है... खैर, रात को यूँ ही वाटर कलर से खेलने का मन हुआ... कुछ छिलके बादाम के कब से संभाल रखे हैं... बार्सिलोना यात्रा के समय के... वाटर कलर के डब्बे में मौजूद बारह कलर्स से बारह छिलकों को रंगा... एक एक को रंगते हुए ब्रश में जो कलर बच जाता था उसे कागज़ पर ऐसे ही पोतते चले गए... यूँ बना ये... सहेज लें इसे भी... कि रंगों का खिलना इस उदास मौसम में दुर्लभ सा ही संयोग है... कागज़ पर उकेरे रंग जीवन के कैनवास को भी समृद्ध करें... ये सम्भावना घटित हो... इसकी प्रार्थना चलती रहे मन ही मन... कभी तो इंतज़ार समाप्त होगा... कभी तो लौटेगी मुस्कान... कि चक्रवत चल रहा है समय... कुछ भी स्थायी नहीं... ये समय बीतेगा और वो समय भी लौटेगा... ...... ... !!
एक एक रंग आपस में मिल कर अलग अलग पर्मुटेसन कॉम्बिनेसन में रच सकते हैं अनेक रंग
अपना वजूद खोता है "मैं" की रट टूटती है तो घटित होता है कुछ अनूठा यहीं है, बस ढूंढनी है हमें जीवन के उदास रंगों में उमंग
यहाँ छुट्टियों पर नहीं आयें हैं हम कि बस खेल हो, मौज हो, पिकनिक हो ये कर्मक्षेत्र है जहाँ अपने बूते जितनी है हमें बाज़ी जीना है हर हाल में लड़ते हुए ज़िन्दगी की जंग
बस चलता रहे सफ़र और ये सफ़र कभी तुम तक भी पहुंचाये किसी मोड़ पर "ज़िन्दगी", ज़िन्दगी से मिल जाये और दूर क्षितिज पर खिल आये सबसे अनूठा रंग... ... !!
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-09-2015) को "हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-2098) पर भी होगी। -- सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। -- चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है। जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये। हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। सादर...! डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-09-2015) को "हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-2098) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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