बहुत सुन्दर प्रस्तुति...! -- आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (02-112-2013) को "कुछ तो मजबूरी होगी" (चर्चा मंचःअंक-1449) पर भी है! -- सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। -- हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। सादर...! डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
अपरिचय से परिचय , परिचय से अपरिचय ज्यों जीवन से मिलना , बिसरना ! इसी दर्शन के बीच पूरी सृष्टि है ! और सृष्टि में सबकी व्यथा एक जैसी ! प्रभाव पूर्ण दर्शन !
12 टिप्पणियाँ:
जीवन क्या है ? दो अपरिचय के बीच परिचय .....दो तम विन्दु के बीच का प्रकाश ....जन्म (मृत्यु ) जीवन मृत्यु ....बहुत सुन्दर परिभाषा ---जीवन दर्शन !
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (02-112-2013) को "कुछ तो मजबूरी होगी" (चर्चा मंचःअंक-1449)
पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
अपरिचय से परिचय , परिचय से अपरिचय ज्यों जीवन से मिलना , बिसरना !
इसी दर्शन के बीच पूरी सृष्टि है !
और सृष्टि में सबकी व्यथा एक जैसी !
प्रभाव पूर्ण दर्शन !
bodh aur abodh ke beech jhoolta man .....shayad yahi hai jivan ....sundar udgar Anupama ......!!
बढ़िया प्रस्तुति-
आभार आदरणीया-
जीवन चक्र को बहुत ही सुंदर शब्द दिये हैं आपने।
सादर
क्या हैं हम, कैसे आये,
आओ ढूढ़े, जो खोया है।
बहुत ही सुन्दर भाव .. सनातन दर्शन को सुन्दर शब्द दिए है आपने .. बधाई आपको ..
यही कथा है शाश्वत
कोई सपनों को अपना बनाता है
कोई अपनों को सपना …
साँसों के साथ मृत्यु चलती है
मृत्यु के बाद भी रहता है यादों का जीवन
जीवन दर्शन शब्दों में उतारा है ... ये माया है या असल ... क्या पता ...
बेहतरीन अभिवयक्ति.....
जीवन दर्शन
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