अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

इंतज़ार...!

एक प्रिय मित्र ने हमसे कहा था कभी
इंतज़ार से अच्छी और बुरी चीज़
कोई नहीं...


तब से हम
जी रहे हैं हर वो अच्छी चीज़
जो निहित है इंतज़ार में,
और हर वो बुरी चीज़ भी
हमको तार तार किये हुए है
जो इंतज़ार की घड़ियों का सच है...


पीड़ा ही है इंतज़ार
आनंद भी है इंतज़ार 


तो,


पीड़ा भी है
सुकून भी है 


दोनों ही है इंतज़ार...???


इस आशय से

गणित के सिद्धांत की मानें तो

पीड़ा को ही
आनंद कह जाएँ...

कि
प्रतीक्षा
दोनों ही भावों को
जीने का नाम है...
सुबह कभी यह
तो कभी यह
घिर आई शाम है... 


अब कविता में

कहनी हो यह बात

तो पीड़ा एवं आनंद को
समकक्ष रखते हुए
यूँ कह लें-
पीड़ा में ही आनंद है...
दोनों में मूलतः कहाँ कोई द्वन्द है...


बहती रहे अश्रूधार,
जीवन रहते करते ही रहना है...

जीवन का इंतज़ार...!!!

7 टिप्पणियाँ:

ब्लॉग बुलेटिन 13 दिसंबर 2013 को 5:34 am  

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन संसद पर हमला, हम और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

ambuj kumar khare 13 दिसंबर 2013 को 5:53 am  

एक प्रिय मित्र ने हमसे कहा था कभी
पीड़ा में ही आनंद है...
दोनों में मूलतः कहाँ कोई द्वन्द है...
और
जीवन रहते करते ही रहना है...
जीवन का इंतज़ार...!!!
अद्वतीय ; अदभुत ; काव्य रचना !!

Anita 13 दिसंबर 2013 को 8:34 am  

जीवन रहते जब जीवन का करेंगे इंतजार तब तो जीवन से मिलने का कोई उपाय नहीं...जीवन रहते बस करना है स्वागत ...तब हर क्षण उसका साथ है...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 13 दिसंबर 2013 को 9:21 am  

waah!

Rajeev Kumar Jha 13 दिसंबर 2013 को 11:59 am  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-12-2013) "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1461 पर होगी.
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
सादर...!

देवेन्द्र पाण्डेय 14 दिसंबर 2013 को 4:47 am  

इंतजार की दुखद घड़ियाँ भी इंतजार खत्म होने पर आनंद का एहसास कराती हैं।

प्रवीण पाण्डेय 17 दिसंबर 2013 को 5:48 am  

आगत की प्रतीक्षा और विगत का स्मृति आनन्द।

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कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
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मेरे आँगन में...
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