अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

आँख का पानी...!

रोते हुए...
सिसकते हुए...
जाने क्या क्या
कहे जा रहे थे आंसू...

उन पर
कभी नहीं रहा है मेरा वश
उन्हें जब बहना है बहेंगे ही
जो कहना है कहेंगे ही... 


फिर भी,
जितना... जो जैसा
कहा-अनकहा
छुआ-अनछुआ
दर्द है हृदय में
कहाँ सब कह पायेंगे...?


आंसू बहेंगे...
चूक जायेंगे...
फिर मूक हो जायेंगे... 


पर, जो-
कहा-अनकहा
छुआ-अनछुआ
दर्द है भीतर,
वह तो
रिसता रहेगा ही...
ये दौर कभी
थमेगा नहीं...


कि
जब तक है जीवन
चलती रहनी है कहानी
बहता आया है
बहता ही रहेगा आँख का पानी... !!!

8 टिप्पणियाँ:

रविकर 5 दिसंबर 2013 को 5:40 am  

बढ़िया-

Anita 5 दिसंबर 2013 को 9:50 am  

सारे सागरों में भरा है जो वह पानी नहीं है आँसू ही तो हैं...इस जगत में इतना दुःख है कि वे भी कम पड़ते हैं...

Yashwant Yash 5 दिसंबर 2013 को 10:21 am  

कल 06/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

Anupama Tripathi 5 दिसंबर 2013 को 11:21 am  

आँखों से पानी की भी अद्भुत है कहानी ....हृदयस्पर्शी भाव ....

kavita verma 5 दिसंबर 2013 को 3:41 pm  

bahut badiya ..

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 6 दिसंबर 2013 को 2:20 am  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (06-12-2013) को "विचारों की श्रंखला" (चर्चा मंचःअंक-1453)
पर भी है!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Manjusha pandey 6 दिसंबर 2013 को 9:54 am  

बहुत सुन्दर...

Mukesh Pandey 10 दिसंबर 2013 को 8:05 am  

सत्य कथन :)

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