अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

नया दिन...!

चिरंतन के लिए 'नया दिन' शीर्षक से कुछ लिखना था... आभार चिरंतन, नए दिन के लिए... नयेपन की उम्मीद के साथ कुछ लिखने को प्रेरित करने के लिए...
यहाँ भी सहेज लें, नए दिन की ओर अनमने देखती नज़र और मौन प्रार्थना को...


हर दिन
एक सा होता है...
वही दोहराव देख
मन कितना रोता है...


वैसे ही
चलता जाता है क्रम...
बढ़ते ही जाते हैं
अन्यान्य भ्रम...


कितनी तो
विवश हैं राहें...
कोई नहीं थामता
किसी की बाहें...


ज़िन्दगी हर दिन
ढलती शाम हो जाती है...
गम की आंधियां
बहुत सताती हैं...


प्रेम कहीं कोहरे में
ओझल होता है...
मैं तुम के द्वन्द में
मन बोझल होता है...


बादल
नए गगन की तलाश में
नयी राह पकड़ते हैं...
अजीब स्थिति है,
एक दूसरे के पूरक होकर
मन-मस्तिष्क आपस में खूब झगड़ते हैं...


ये सब
दिन भर
चलता रहता है...
पर ये भी सच है
हर रात के बाद
एक नया दिन निकलता है...


नए दिन की देहरी पर
नए विश्वास के साथ
चरण धरना है...
आसमान के
सूरज का स्वागत
धरा के अनगिन सूर्यों को करना है...


अपना तेज़
पहचान कर...
अपनी क्षमताओं को
जान कर...


जब हम
सूरज सम
लोककल्यान की खातिर जलेंगे...
तब देखना
नए दिन की आँखों में
सुनहरे स्वप्न पलेंगे...


"सर्वे भवन्तु सुखिनः"
वाली प्रार्थना
फलित हो जायेगी...
सुन्दर है कितनी ये धरा
हम सबके पूण्य प्रताप से
और ललित हो जायेगी...!

24 टिप्पणियाँ:

Amit Srivastava 31 दिसंबर 2013 को 6:01 pm  

"नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें"

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 31 दिसंबर 2013 को 9:01 pm  

नवागत वर्ष सन् 2014 ई. की हार्दिक शुभकामनाएं

Kaushal Lal 1 जनवरी 2014 को 1:39 am  

बहुत सुन्दर ....नव वर्ष मंगलमय हो

रविकर 1 जनवरी 2014 को 4:10 am  

हो जग का कल्याण, पूर्ण हो जन-गण आसा |
हों हर्षित तन-प्राण, वर्ष हो अच्छा-खासा ||

शुभकामनायें आदरणीया

Yashwant Yash 1 जनवरी 2014 को 8:10 am  

आप को नव वर्ष 2014 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ!

कल 02/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

Rakesh Kumar 1 जनवरी 2014 को 9:12 am  

सुन्दर प्रस्तुति.
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

Aditi Poonam 1 जनवरी 2014 को 11:29 am  

सुंदर कविता के सुंदर भाव ......नव-वर्ष की शुभ कामनाएं


Anupama Tripathi 1 जनवरी 2014 को 12:22 pm  

सुंदर विचार ...नव वर्ष की शुभकामनायें ।

Anita 1 जनवरी 2014 को 12:28 pm  

जो अभी कल्पना है एक दिन साकार होगी...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 1 जनवरी 2014 को 2:21 pm  

बहुत सुन्दर वर्णन है नूतन के आगमन का और बहुत ही सुन्दर कामनाएँ.. आप्के स्वरों में हमारा भी स्वर सम्मिलित माना जाए!!

देवेन्द्र पाण्डेय 1 जनवरी 2014 को 4:39 pm  

सही है.. लोक कल्यान की खातिर सूरज के समान जलना पड़ेगा।

Rakesh Kumar 2 जनवरी 2014 को 12:59 am  

जब हम
सूरज सम
लोककल्यान की खातिर जलेंगे...
तब देखना
नए दिन की आँखों में
सुनहरे स्वप्न पलेंगे..

बहुत ही सुन्दर अनुपमा जी.

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

गीता पंडित 2 जनवरी 2014 को 3:05 am  

बहुत सुन्दर ..नव वर्ष की शुभकामनायें ।

वाणी गीत 2 जनवरी 2014 को 5:21 am  

एक दूसरे के पूरक होकर भी मन -मस्तिष्क खूब झगड़ते हैं। कश्मकश के बीच नया दिन होता है , नई सुबह , नए विश्वास के साथ !
प्रेरक रचना !

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 2 जनवरी 2014 को 7:29 am  

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए...!
RECENT POST -: नये साल का पहला दिन.

Digamber Naswa 2 जनवरी 2014 को 8:12 am  

नव वर्ष की मंगल कामनाएं ...

sushma 'आहुति' 2 जनवरी 2014 को 8:35 am  

भावो की
बेहतरीन........आपको भी नववर्ष की शुभकामनायें

Pratibha Verma 2 जनवरी 2014 को 3:00 pm  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। । नव वर्ष की हार्दिक बधाई।

sunita agarwal 2 जनवरी 2014 को 3:30 pm  

सुन्दर प्रस्तुति .. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये :)

जयकृष्ण राय तुषार 3 जनवरी 2014 को 4:15 am  

बहुत ही सुन्दर कविता |नववर्ष आपको मंगलमय हो |

Amrita Tanmay 11 जनवरी 2014 को 7:16 am  

शुभकामनाएँ।

Mukesh 15 जनवरी 2014 को 1:13 pm  

आपकी रचना पढ़ते पढ़ते ये गीत ध्यान आया... शायद आपको भी छू जाये...
http://www.youtube.com/watch?v=RVxHTMEBdZo

अनुपमा पाठक 15 जनवरी 2014 को 1:18 pm  

बेहद सुन्दर गीत...
मुकेश जी, लिंक शेयर करने के लिए आभार...!

Mukesh Pandey 15 जनवरी 2014 को 4:07 pm  

आपके शब्द बहुत प्रेरणादायक हैं,
बहुत सुन्दर कविता :)

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