आंसू क्या वाकई जीवन को जीवन होने से रोक सकते हैँ? शायद नहीं, वरना इनके होने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
जीवन के बारे में बहुत सुन्दर और गहरी सोच !अनुभूति : अपूर्ण मकसद !:मेरे विचार मेरी अनुभूति: चक्रव्यूह
सचमुच समय ही हमें तराशता है...अवलम्ब पुनः पुनः मिलता है..और जीवन का फूल खिलता है...
बेहतरीन ।
खूबसूरत रचना
आज हैंकल नहीं रहेंगे...तब भी तुम्हें हमअपना कहेंगे...मन को छू गई पंक्तियां
बहुत ही उम्दा रचनायहाँ यहाँ भी पधारेंhttp://chlachitra.blogspot.comhttp://cricketluverr.blogspot.com
7 टिप्पणियाँ:
आंसू क्या वाकई जीवन को जीवन होने से रोक सकते हैँ? शायद नहीं, वरना इनके होने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
जीवन के बारे में बहुत सुन्दर और गहरी सोच !
अनुभूति : अपूर्ण मकसद !:
मेरे विचार मेरी अनुभूति: चक्रव्यूह
सचमुच समय ही हमें तराशता है...अवलम्ब पुनः पुनः मिलता है..और जीवन का फूल खिलता है...
बेहतरीन ।
खूबसूरत रचना
आज हैं
कल नहीं रहेंगे...
तब भी तुम्हें हम
अपना कहेंगे...मन को छू गई पंक्तियां
बहुत ही उम्दा रचना
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