अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

हैप्पी बर्थडे, अर्णव...!

Dear Arnav,
Well, I heard that you are also called Anu... भैया कहते हैं अर्णव से अर्णु पुकारते पुकारते अनु हो गया तुम्हारा भी नाम... चलो ऐसा ही है जीवन... हम सब अलग अलग होते हुए भी एक ही हैं... अब देखो तुम अर्णव और हम अनुपमा होते हुए भी अनु हैं... ये कितनी सहज सामान्य सी बात है लेकिन तुम्हारी बुआ अभिभूत है इस बात से...! जन्मदिन है आज तुम्हारा... पहली बार तुमसे बात हो रही है... क्या उपहार दें... ये समझ नहीं पा रहे हैं... बस लिखना शुरु कर दिया है... देखें क्या सृजित होता है तुम्हारे लिए...! 
बच्चे, हम लोग बेहद अजीब समय में जी रहे हैं... यहाँ अपने सिवा सबको दूसरे अधम ही लगते हैं... विश्वास और प्रेम निश्छलता खो चुके हैं... जिसमें रत्ती भर भी स्वार्थ नहीं होना चाहिए था... वह प्रेम भी अब स्वार्थ का ही मूर्त रूप बना बैठा है... ऐसे में हम सब को सिखाओ अपनी भोली बातों से कुछ सुन्दर... शाश्वत और नवीन...! हम तुम्हें क्या देंगे... तुम ही दे सकते हो हमें उम्मीद... और दे भी रहे हो अपनी सहज अठखेलियों से...!
तुम दोनों की आवाज़ इतनी दूर इस तरह पहुंची जैसे तरसते हुए मरूस्थल में फुहारें पहुँचती हैं... जन्मदिन तुम्हारा है और उपहार भी तुम ही दे रहे हो... अद्भुत है भाई यह तो...! :)
प्यारी अन्वेषा का हमेशा ख्याल रखना... कितनी स्मार्ट है वो... देखना जब कमज़ोर पड़ोगे तुम वो बनेगी तुम्हारी उर्जा... तुम्हारी शक्ति... खूब मिल जुल कर रहना... उसे बहुत प्यार देना... बदले में तुम्हें दुनिया भर का स्नेह मिलेगा उससे...  अब देखो तुम्हारी अनु बुआ के पास देने को कुछ है नहीं तो खाली बकबक ही तो करेगी न फ़ालतू...
चलो नाना जी के साथ एन्जॉय करो... पापा से बड़ा वाला केक मंगवाओ और मनाओ खुशियाँ दोस्तों के साथ... हम फिर बात करेंगे...!
जब आयेंगे तो लेते आयेंगे ढेर सारे चोकलेट्स और खिलौने और अन्वेषा के लिए सबसे प्यारी वाली गुड़िया...
अब मस्ती करो तुमलोग... खूब खुश रहो...
बहुत बहुत स्नेह...
और एक बार फिर से हैप्पी वाला बर्थडे... !!!

Yours,
Anu...

5 टिप्पणियाँ:

Manoj Kumar 30 जून 2015 को 4:33 pm  

Happy Birthday..........

ब्लॉग बुलेटिन 1 जुलाई 2015 को 3:01 pm  

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, मुसकुराते रहिए और स्वस्थ रहिए - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

सुशील कुमार जोशी 1 जुलाई 2015 को 4:48 pm  

शुभकामनाऐं ।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 1 जुलाई 2015 को 7:22 pm  

बच्चों को एक नाम की क़ैद में रहना भी नहीं चाहिये.. अर्णब हो, अर्णू हो, अनू हो, या फिर मुन्ना, कुची कू, बाबू... बड़े होकर तो मि. सो ऐण्ड सो हो ही जाना है.. बचपन तो गुज़ार लें हर रोज़ एक नये नाम के साथ.. बहुत ख़ूबसूरत गुफ़्तगू भ्रातृज के साथ. मेरी ओर से भी विलम्बित आशीष!!

Anita 8 जुलाई 2015 को 10:35 am  

बहुत प्यारा सा गिफ्ट..

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