जीयें इस पल में... !!




समय की गति ऐसी है
"बीता हुआ कल" सपना सा लगता है 


कभी ऐसे भी थे हम ?!


साश्चर्य आँखें भर आती हैं... !! 

---
"आने वाले कल" में
ये "आज" भी
आश्चर्य सा ही प्रतीत होगा



कि तब अपना स्वरुप
पूर्णतः परिवर्तित हो चुका होगा...
जो आज से कहीं अधिक भिन्न होगा...
और शायद
बीते हुए कल के कहीं निकट... 



कि बुढ़ापा दूसरा बचपन ही तो होता है !!

---
हर पल
बदल रहे हैं हम
हर क्षण
बीत रहे हैं हम 



जीयें इस पल में
कि मुट्ठी से, रेत की तरह, एक रोज़ फिसल जाना है जीवन !! 


7 टिप्पणियाँ:

vandana gupta 1 जुलाई 2017 को 1:27 pm बजे  

सही कहा आपने .........यात्रा कहीं से शुरू हो वापसी घर पर ही होती है :)सुन्दर प्रस्तुति

Onkar 1 जुलाई 2017 को 2:40 pm बजे  

सही कहा

रश्मि प्रभा... 1 जुलाई 2017 को 3:08 pm बजे  

हम परिवर्तन चाहते हैं - बड़े होना चाहते हैं जब होते हैं छोटे
बड़ा होना ही है, इससे बेखबर चाहते हैं
जब हम बड़े होते जाते हैं तब एक दिन - हम छोटे हो जाना चाहते हैं
शयद उसी बचपन के लिए हम मृत्यु को पाते हैं
मृत्यु और जन्म एक परिवर्तन है

संजय भास्‍कर 1 जुलाई 2017 को 4:15 pm बजे  

सुन्दर प्रस्तुति

Abhi 1 जुलाई 2017 को 6:16 pm बजे  

जीयें इस पल में
कि मुट्ठी से, रेत की तरह, एक रोज़ फिसल जाना है जीवन !!
exactly!!!
Btw, Ye aap hain? tasveer me? So Lovely!!!! :)

Satish Saxena 2 जुलाई 2017 को 5:58 am बजे  

बढ़िया !
हिन्दी ब्लॉगिंग में आपका लेखन अपने चिन्ह छोड़ने में कामयाब है , आप लिख रही हैं क्योंकि आपके पास भावनाएं और मजबूत अभिव्यक्ति है , इस आत्म अभिव्यक्ति से जो संतुष्टि मिलेगी वह सैकड़ों तालियों से अधिक होगी !
मानती हैं न ?
मंगलकामनाएं आपको !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Jyoti khare 2 जुलाई 2017 को 7:46 am बजे  

वर्तमान में जीना ही उत्तम होता है
सुंदर पोस्ट
सादर

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ