मनःशान्ति के लिए :: डॉ. सत्यनारायण पाण्डेय


लें संकल्प ::


मै क्रोध नहीं करूंगा । 


चिन्ता न पास फटक पाये
ऐसा यत्न करूंगा । 


अपना दैनंदिन कार्य-
आलस्यरहित हो करूंगा । 


किसीपर निर्भरता से दूर-
सम्भव हुआ तो --
दूसरे की-
सहायता ही करूंगा । 


हो सभी जीवों से प्रेम -- 


कि है सब में --
एक ही ईश्वर का वास ! 


अगर यह ज्ञान "सम्यक" हो जाए-
फिर कौन?
किसी पर क्रोध करेगा?


होगी यह भावना पुष्ट,
तो सहअस्तित्व और सेवाभाव जगेगा ।

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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