शुभ जन्मदिवस, अमित जी!!

[ छोटी बहन और दामाद जी !! अमित अनामिका ] 




जोड़ियाँ
उपरवाला तय करता है...


सुना  है
उसने हम सबको जोड़ियों  में बनाया है...


हर एक हृदय के लिए कही एक धड़कता हुआ दिल है...
हर एक पंछी का एक साथी पखेरू है... 


दिए के लिए
सदा समर्पित उसकी बाती है
और यह संयोग
दुनिया की सबसे अनुपम घटना है 


कि...


दिए और बाती का साथ होना
प्रकाश का निर्मित होना है... !


मोम के साथ धागा जलता है...
और धागे के साथ मोम पिघलती है...


ये संयोग
युगों से घटित होता आ रहा है...
जीवन अन्यान्य पड़ावों से गुज़रता हुआ
साथ-संवेदना के गीत ही तो गा रहा है...


ये संगीत अनुपम
आप दोनों के जीवन में सदैव ध्वनित हो...
इतनी खुशियां हों आँचल में
कि मन प्राण विस्मित हों...


युग युग तक यह जोड़ी
यूँ ही परिवार का मान रहे...
ये साथ है, तो सब कुछ है-
इस सत्य की बस पहचान रहे...


कितने उत्सव जीवन के
फिर यूँ ही मूर्त होते रहेंगे...


हर क्षण ही उत्सव होगा...


स्वतः आपके द्वारा
प्रकाश-परमार्थ के निमित्त
कर्म होते रहेंगे... !!


जीवन  सदैव  मुस्कुराता  रहे
हर जन्मदिन यूँ ही यादों को समृद्ध बनाता रहे... !!


शुभ जन्मदिवस, अमित जी!!

3 टिप्पणियाँ:

अरुण चन्द्र रॉय 18 जुलाई 2017 को 5:22 am बजे  

बढ़िया


डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 18 जुलाई 2017 को 8:37 am बजे  

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (19-07-2017) को "ब्लॉगरों की खबरें" (चर्चा अंक 2671) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

'एकलव्य' 18 जुलाई 2017 को 7:52 pm बजे  

बहुत सुन्दर ,आभार। "एकलव्य"

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