उप्साला... कार्ल लीनियस का शहर... इस महान जीव विज्ञानी की धरोहर को सहेजे हुए यह शहर विशिष्ट रूप से स्मृति में अंकित हो गया...! बहुत सुन्दर अनुभव रही उप्साला यात्रा, एक बार पुनः जाने की इच्छा लिए जब हम लौटे तो बहुत सारे भाव थे, बहुत सारे तथ्य थे जो मुझे अपने लिए लिख कर सहेज लेने का मन था, कुछ लिखा भी था पर पूर्ण नहीं कर पायी और देखते देखते तारीख २० मई से बदलते हुए आज १० जुलाई हो आई... आज सब समेट कर बैठी हूँ यात्रा की यात्रा पर निकलने को... सब सिलसिलेवार लिख कर सहेजने को, सबों से बांटने को...!
तो शुरू करते हैं यात्रा...
स्टॉकहोम से करीब ७० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है उप्साला. हम सुबह बस से निकले और दस बजे तक वहाँ पहुंचे. एक ही दिन का समय लेकर निकले थे, रात को वापस आ जाना था. जाते हुए बस में ढ़ेर सारी सूचनाओं, मानचित्र, जगहों के विषय में पढ़ते हुए जा रहे थे कि नयी जगह पर क्या क्या देखना है, कहाँ कहाँ जाना है और कैसे जाना है.
तो शुरू करते हैं यात्रा...
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9 टिप्पणियाँ:
कार्ल लीनियस और उनके घर व शहर के बारे मे लिखे इस यात्रा वृतांत को पढ़ कर लगा ही नहीं कि आप 1 वर्ष पहले वहाँ गयी थीं।
सपनों से देश की इस सुंदर सी जगह के बारे मे जान कर बहुत अच्छा लगा। इस पोस्ट का लिंक दोबारा भी पढ़ने के लिए सहेज लिया है। आशा है इस यात्रा के और पड़ावों के बारे में आपकी अगली पोस्ट जल्द ही पढ़ने को मिलेगी।
सादर
Thanks a lot Yashwant ji:)
Hope to write the next post of this series soon!
यात्रा वृतांत पढ़ना हमेशा अच्छा लगता है और साथ में तस्वीरें भी हों तो लगता है कि हम भी घर बैठे एक यात्रा कर आए.
आपके लेखक, आपके फोटोग्राफर को ढेर सारी शुभकामनाएँ. अगली कड़ियों की प्रतीक्षा रहेगी...
धरोहर को जब यूँ संभाल कर रखा जाता है, इतना मान दिया जाता है तब बनता है कोई शहर प्राणवान…!
बिलकुल वैसे ही जैसे आपके शब्द इस धरोहर को सम्हाल कर हम तक पहुंचा रहे हैं ....और आपके साथ साथ हमने भी जैसे घूम लिया उप्साला .........और लिनियस का घर बहुत सुंदर लगा ....
अगली कड़ी का इंतज़ार ....:))
शुभकामनायें ।
सुन्दर यात्रा वृतांत
सही कहा जब कोई धरोहर को रखा जाता है संभाल कर तब बनता है प्राणवान शहर बहुत अच्छी जानकारी और चित्र भी शुक्रिया !!
अति सुन्दर ..
आपकी बाद वाली पोस्ट पहले पढ़ ली, अब मिला पूरा परिचय।
ये आपने आज कितनी सैर करवा दी हमें....बहुत अच्छा लग रहा है यूँ पढ़ना...तस्वीरें तो बस देखे जा रहे हैं हम...:)
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