विस्तार पाता जाता है व्योम!

मैं सबसे ज्यादा खुश थी जब
तब लिखी मैंने सबसे उदास कविता,
जब था मन बैठा दुःख के तीरे
तब खिंची कविता में मैंने
मुस्कान की लकीरें…  


दशा अभिव्यक्त हुई
या दशा का विलोम?
ये कलम का अधिकारक्षेत्र है,
विस्तृत उसका व्योम! 


इसमें
कहीं नहीं हूँ मैं
या कुछ भी मेरा
देखिये, शायद कहीं दिख जाए आपको
रात के अँधेरे से
उगता हुआ सवेरा 


यह कोई शब्दों का करिश्मा न होगा,
सवेरे का दिख जाना…
आपकी ही सिफ़त होगी!
इस श्रेय के लिए,
कलम आपके समक्ष…
मौन, विनीत व नत होगी!


लिखने वाले से ज्यादा,
शब्दों को उनके अर्थ
पढ़ने वाला देता है…
कम न आंकना उसकी क्षमता
वो जो
कविता का अध्येता है! 


अपने पढ़ने वालों तक पहुँच कर, 

फिर उनमें…
नए सिरे से उगती है!
कविता नए नए रूप धर
खग वृन्दों सम…
संभावनाओं के दाने चुगती है! 


और,


विस्तार पाता जाता है व्योम
कलम न रही है, न रहेगी मौन! 

12 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय 5 अगस्त 2013 को 1:52 pm बजे  

विलोम दिशा में दृश्य सर्वाधिक स्पष्ट होता है।

ANULATA RAJ NAIR 5 अगस्त 2013 को 2:32 pm बजे  

शुक्रिया हमें सर चढाने का :-)
jokes apart...........

very expressive and a unique poem !!!

anu

धीरेन्द्र अस्थाना 5 अगस्त 2013 को 4:07 pm बजे  

sachche maynon me pathak hi shbdon ke bhavon ka moolynkn krta hai


aur lekhni n rhi hai n rhegi maun.

rchna bhi kyee mnah sthitiyo ki or ingit krti hai.

Ranjana verma 5 अगस्त 2013 को 4:25 pm बजे  

विस्तार पता जाता है व्योम
कलम न रही है न रहेगी मौन!!
सीधे दिल से निकली हुई बहुत खुबसूरत रचना !!

अशोक सलूजा 5 अगस्त 2013 को 5:36 pm बजे  

आप का लिखा महसूस कर सकता हूँ ....बयाँ करने के लिए टिप्पणी नही !
स्वस्थ रहें !

Maheshwari kaneri 5 अगस्त 2013 को 5:56 pm बजे  

दिल से निकली हुई बहुत खुबसूरत रचना !!

विभा रानी श्रीवास्तव 5 अगस्त 2013 को 6:54 pm बजे  

अपने पढ़ने वालों तक पहुँच कर,
फिर उनमें…
नए सिरे से उगती है!
कविता नए नए रूप धर
~~
बिल्कुल सच
अलग-अलग खोपड़ी तक पहुंचता है
तो
अलग-अलग सोच के अनुसार हो जाता है

Tamasha-E-Zindagi 5 अगस्त 2013 को 7:11 pm बजे  

लाजवाब रचना

Anita 6 अगस्त 2013 को 7:20 am बजे  

कवि लिखता है जो उसका आदर्श है..चाहे वह अभी तक वहाँ पहुंचा न हो पर हो सकता है उसके कारण कोई और पहुंच जाये...

कालीपद "प्रसाद" 7 अगस्त 2013 को 7:00 pm बजे  

लिखने वाले से ज्यादा,
शब्दों को उनके अर्थ
पढ़ने वाला देता है…
कम न आंकना उसकी क्षमता
वो जो
कविता का अध्येता है! --
कविता को पंख तो पढने वाला ही लगता है, बहुत बढ़िया बात कही
latest post: भ्रष्टाचार और अपराध पोषित भारत!!
latest post,नेताजी कहीन है।
!

कौशल लाल 27 अगस्त 2013 को 6:18 pm बजे  

नई कविता के प्रेरणास्वरूप,
बहुत खुबसूरत...

Mukesh Pandey 26 अक्टूबर 2013 को 8:26 am बजे  

इसमें
कहीं नहीं हूँ मैं
या कुछ भी मेरा
देखिये, शायद कहीं दिख जाए आपको
रात के अँधेरे से
उगता हुआ सवेरा

लिखने वाले से ज्यादा,
शब्दों को उनके अर्थ
पढ़ने वाला देता है…
कम न आंकना उसकी क्षमता
वो जो
कविता का अध्येता है! (रीडिंग इज बट ए साइलेंट कोन्व्रज़ेशन :) )

विस्तार पाता जाता है व्योम
कलम न रही है, न रहेगी मौन!

बहुत ही सौन्दर्यपूर्ण अभिव्यक्ति।
बधाई आपको।।

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