मैं सबसे ज्यादा खुश थी जब
तब लिखी मैंने सबसे उदास कविता,
जब था मन बैठा दुःख के तीरे
तब खिंची कविता में मैंने
मुस्कान की लकीरें…
दशा अभिव्यक्त हुई
या दशा का विलोम?
ये कलम का अधिकारक्षेत्र है,
विस्तृत उसका व्योम!
इसमें
कहीं नहीं हूँ मैं
या कुछ भी मेरा
देखिये, शायद कहीं दिख जाए आपको
रात के अँधेरे से
उगता हुआ सवेरा
यह कोई शब्दों का करिश्मा न होगा,
सवेरे का दिख जाना…
आपकी ही सिफ़त होगी!
इस श्रेय के लिए,
कलम आपके समक्ष…
मौन, विनीत व नत होगी!
लिखने वाले से ज्यादा,
शब्दों को उनके अर्थ
पढ़ने वाला देता है…
कम न आंकना उसकी क्षमता
वो जो
कविता का अध्येता है!
अपने पढ़ने वालों तक पहुँच कर,
फिर उनमें…
नए सिरे से उगती है!
कविता नए नए रूप धर
खग वृन्दों सम…
संभावनाओं के दाने चुगती है!
और,
विस्तार पाता जाता है व्योम
कलम न रही है, न रहेगी मौन!
12 टिप्पणियाँ:
विलोम दिशा में दृश्य सर्वाधिक स्पष्ट होता है।
शुक्रिया हमें सर चढाने का :-)
jokes apart...........
very expressive and a unique poem !!!
anu
sachche maynon me pathak hi shbdon ke bhavon ka moolynkn krta hai
aur lekhni n rhi hai n rhegi maun.
rchna bhi kyee mnah sthitiyo ki or ingit krti hai.
विस्तार पता जाता है व्योम
कलम न रही है न रहेगी मौन!!
सीधे दिल से निकली हुई बहुत खुबसूरत रचना !!
आप का लिखा महसूस कर सकता हूँ ....बयाँ करने के लिए टिप्पणी नही !
स्वस्थ रहें !
दिल से निकली हुई बहुत खुबसूरत रचना !!
अपने पढ़ने वालों तक पहुँच कर,
फिर उनमें…
नए सिरे से उगती है!
कविता नए नए रूप धर
~~
बिल्कुल सच
अलग-अलग खोपड़ी तक पहुंचता है
तो
अलग-अलग सोच के अनुसार हो जाता है
लाजवाब रचना
कवि लिखता है जो उसका आदर्श है..चाहे वह अभी तक वहाँ पहुंचा न हो पर हो सकता है उसके कारण कोई और पहुंच जाये...
लिखने वाले से ज्यादा,
शब्दों को उनके अर्थ
पढ़ने वाला देता है…
कम न आंकना उसकी क्षमता
वो जो
कविता का अध्येता है! --
कविता को पंख तो पढने वाला ही लगता है, बहुत बढ़िया बात कही
latest post: भ्रष्टाचार और अपराध पोषित भारत!!
latest post,नेताजी कहीन है।
!
नई कविता के प्रेरणास्वरूप,
बहुत खुबसूरत...
इसमें
कहीं नहीं हूँ मैं
या कुछ भी मेरा
देखिये, शायद कहीं दिख जाए आपको
रात के अँधेरे से
उगता हुआ सवेरा
लिखने वाले से ज्यादा,
शब्दों को उनके अर्थ
पढ़ने वाला देता है…
कम न आंकना उसकी क्षमता
वो जो
कविता का अध्येता है! (रीडिंग इज बट ए साइलेंट कोन्व्रज़ेशन :) )
विस्तार पाता जाता है व्योम
कलम न रही है, न रहेगी मौन!
बहुत ही सौन्दर्यपूर्ण अभिव्यक्ति।
बधाई आपको।।
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