राहें बुलाती हैं...

राहें बुलाती हैं...
सड़कें आवाज़ देती हैं...


कि...

सफ़र है
तो ही हैं कवितायेँ...


कच्ची-पक्की,
वीरान-अनजान सड़कों पर चले बिना
शब्द यात्रा संभव भी कहाँ है... !


बिना टूटे, बिना बिखरे, बिना चोट खाए
कैसे पता चलेगा ज़िन्दगी का स्वाद...


जो न होंगे आंसू तो कैसे होगा फिर दर्द का अनुवाद... !!


इस लिए यात्राएं आवश्यक हैं...


कई तरह की
कई कई तरह से


सड़क पर खाली पांव विचरते हुए
किनारों पर उग आई घास की नमी महसूसने की यात्रा...


ओस से झांकते इन्द्रधनुषी रंगों को
मन में बसा लेने की यात्रा...


सरपट दौड़ती राहों में
अपने क़दमों के नीचे की ज़मीं को
तलाशने/तराशने की यात्रा...


अपने ही अन्दर चल  कर
अपने आप तक पहुँचने की यात्रा...


कि यात्राएं आवश्यक हैं


कई तरह की
कई कई तरह से !!


3 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 21 जून 2017 को 8:34 am बजे  

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (22-06-2017) को
"योग से जुड़ रही है दुनिया" (चर्चा अंक-2648)
पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Anita 21 जून 2017 को 11:31 am बजे  

जीवन भी तो एक यात्रा है..एक सुहानी यात्रा..

Rahul... 23 जून 2017 को 5:21 pm बजे  

Yatra...aapke shabdon ki..

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अनायास आ गयी
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