क्यों न हम रिश्तों के उपवन बनाएं फिर उसमें फूलों की चादर बिछायें, पैरों को मिलेगा सुकून और मन तो रहेगा ही नहीं..प्रेम में खो ही जायेगा
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क्यों न हम रिश्तों के उपवन बनाएं फिर उसमें फूलों की चादर बिछायें, पैरों को मिलेगा सुकून और मन तो रहेगा ही नहीं..प्रेम में खो ही जायेगा
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