ईला, तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारे लिए...

गायत्री वल्लभ ,ईला















गुड़िया रानी...
ये हमारे यहां पहला जन्मदिन है न तुम्हारा !


पहली खुशियां अनमोल होती हैं


'पहला'--
इस शब्द से जुड़ा होता है
कितना कुछ अमूल्य जीया हुआ


जैसे पहली खुशी
जो मात-पिता ने तुम्हे पहली बार चलते देख महसूसी होगी


पहली बार स्कूल यूनिफॉर्म पहनने का सुख याद होगा
शायद पहली बार स्कूल जाते हुए तुम रोयी होगी


गुणा भाग जोड़ घटाव
गिरना संभलना याद होगा
हमें आभास है ::
तुम्हारे घर में आज कितना सूनापन
तुम्हारे बाद होगा


पहली बार कुछ खोया होगा
वो गम भूली नहीं होगी
आज भी पा कर छोटे छोटे सुख
देखना, आंखों में आसुओं की लड़ी होगी !


पहले पहल की ये खुशियां
तुम आजीवन जीना 


पल पल जीवन में जड़ती रहना
भाव-भाषा का अनमोल नगीना... !!


आज तुम्हारे साथ तुम्हारा हमसफ़र भी है
संग उसके मिलकर
खिलखिल फूलों सा मुस्काना...
इन अकिंचन शब्दों में ही
हमारी ओर से
जन्मदिन का कोटिशः आशीष पा जाना !!


[[ दीदी/जीजाजी ]]

*** *** ***

ये कितनी प्यारी बात है कि भाई गायत्री वल्लभ ने भी अपनी ईला के लिखा... उन उद्गारों को भी यहाँ सहेज लेते हैं,  तुम्हारे लिए  ईला !!


ईला :: कल्पना से यथार्थ तक
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कल्पनाओं में भी सदा
जिसका स्वरुप धूमिल ही रहा
कौन होगी... कैसी होगी
हृदय में बना कौतूहल ही रहा

कभी-कभी सोचता था
कि कैसी ये रीत है
संयोग से मिल जाती कोई
बनती जीवन की प्रीत है

फिर तुम मिली हमसे...
थोड़ी सकुचाई सी... थोड़ी शरमाई सी
अपने परिवार जनों के बीच बैठी
मन में जाने कितने प्रश्न लिए थोड़ी भरमाई सी

कहते हैं हृदय की कोई भाषा नहीं होती
सच है::
जहाँ "आभाष" हो वहां भाषा की
जरूरत भी नहीं होती

पहली बार जो देखा तुमको तो लगा
मानो जो स्वरुप सदा धूमिल रहा
कभी-कभी जिसकी कल्पना करता था
मन में सदा जो कौतूहल रहा

वह स्वरुप प्रकट हो आया हो
कल्पना जीवंत रूप में उपस्थित हो आई हो
सारे कौतूहल हो गए हो शांत
और सभी प्रश्न उत्तरित से

ऐसी कामना होती सबकी कि
राम-सीता सी जोड़ी हो
मैं राम सा न सही...
पर जनकपुर की "ईला" तुम मेरी सीता हो !
अर्धांगनी जीवनसंगीनी प्राणप्रिये
तुम करती पूर्ण मुझे मेरी "ईले" !!

सेवा-श्रद्धा-विश्वास-त्याग-प्रेम से
यूँ ही हृदय सजाये रखना
चाहे बदल जाये संसार...
तुम सदा
प्रेम-सद्भाव बनाये रखना

मेरे जीवन
मेरे परिवार का
अब तुम अभिन्न अंग हो...
भेद नहीं अब हममें कुछ भी
तुम सदा अब मेरे संग हो...

मैं तुम्हारा पूरक रहूँ
एक दुसरे का हम पर्याय बनें...
ईश्वर की रहे कृपा
हम दोनों मिल कर एक अध्याय बनें

ख़ुशी मेरी हो तो मुस्कान तुम्हारी हो
दुःख-कष्ट में भी हमारी साझेदारी हो
संग हँसता-मुस्कराता-खिलखिलाता रहे हमारा मन
एक दूजे के संग सदा यूँ ही सरस बना रहे जीवन !!

--गायत्री वल्लभ पाण्डेय 

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