तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!
एक सुबह का आगमन
एक संध्या की विदाई
वही पुराना सिलसिला
चक्रवत चलता रहता है!
सदियों के इस मेले में
एक वर्ष की क्या बिसात
प्रचंड अग्नि की लपटों में
जीवन जलता रहता है!
समय जो बीत रहा है
वह लौट नहीं पाएगा
अंत आखिर होना ही है
दिन ढ़लता रहता है!
बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!
नव प्रभात सुखद रहे!
प्रस्तुतकर्ता
अनुपमा पाठक
at
29 दिसंबर 2010

26 टिप्पणियाँ:
समय जो बीत रहा है
वह लौट नहीं पाएगा
अंत आखिर होना ही है
दिन ढ़लता रहता है!
बहुत सार्थक प्रस्तुति.नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !
सुंदर प्रस्तुति......नूतन वर्ष २०११ की आप को हार्दिक शुभकामनाये.
"...तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!...."
बिलकुल! आप की बात शतशः सच है.वक़्त नहीं बदलता!
आप को सपरिवार नववर्ष २०११ की हार्दिक शुभ कामनाएं
सादर
nav varsh ki hardik shubhkamnayen!
अनुपमा जी,
"बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!
सुन्दर अभिव्यक्ति !"
आपको सपरिवार नूतन वर्ष की अनंत मंगलकामनाएं !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ
.तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!...."
बिलकुल सच है.वक़्त नहीं बदलता!
आप को सपरिवार नववर्ष २०११ की हार्दिक शुभ कामनाएं
सार्थक खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.
आप को भी सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.
anupama ji,
bahut hi sundar kavita likhi hai aapne
नव वर्ष 2011
आपके एवं आपके परिवार के लिए
सुखकर, समृद्धिशाली एवं
मंगलकारी हो...
।।शुभकामनाएं।।
नव प्रभात सुखद रहे
नव वर्ष मंगलमय हो .....
आपको नववर्ष 2011 मंगलमय हो ।
एक बेहतरीन रचना ।
काबिले तारीफ़ शव्द संयोजन ।
बेहतरीन अनूठी कल्पना भावाव्यक्ति ।
सुन्दर भावाव्यक्ति । साधुवाद ।
satguru-satykikhoj.blogspot.com
नव प्रभात, नव वर्ष सब सुखद हो , यही कामना है.
सुंदर भावयुक्त कविता ! नव वर्ष सुखद हो यह कामना सभी करेंगे तो असर होकर रहेगा !
नये वर्ष की अनन्त-असीम शुभकामनाएं.
bahut achcha likhi hain.
बीते वर्ष की आशीष के साथ हम सभी नववर्ष की ओर बढ़ें, शुभकामनाएँ.
सदियों के इस मेले में
एक वर्ष की क्या बिसात
प्रचंड अग्नि की लपटों में
जीवन जलता रहता है!
सचमुच, एक वर्ष की क्या बिसात...
सच्चाई का सुंदर वर्णन किया है आपने अपनी इस उत्तम रचना में।
सदियों के इस मेले में
एक वर्ष की क्या बिसात
प्रचंड अग्नि की लपटों में
जीवन जलता रहता है!
xxxxxxxxxxxxxxxxxx
बहुत अर्थ पूर्ण पंक्तियाँ
आपकी कविता के प्रत्येक शब्द में गहरा अर्थ छुपा है ,,इस अर्थपूर्ण कविता के लिए आपको बहुत बहुत बधाई
आपको भी नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें..देर से पहुँचने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ
आशा है यह नव वर्ष आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लेकर आएगा ..शुक्रिया ..मेरे ब्लॉग पर आने के लिए
"...तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!...."
अनुपमा जी, सही कहा आपने आज की भेड़-चाल दुनियां में तारीखें तो बदल जाती हैं मगर सोच वहीँ की वहीँ रह जाती है.ऐसा इसलिए है क्योंकि तारीखें तो हमारी बनाई हुई हैं .वक्त अपने हिसाब से चलता है ,इसलिए इसके बदलने में सदियाँ गुजर जाती है.बेहद सुंदर प्रस्तुति.
सही बात है, तारीखें बदल जाती हैं, वक्त कहाँ बदलता नया साल आने में या पुराने साल के जाने में..
नव वर्ष आपके लिए भी सुखद रहे..
बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!
बहुत खूब ... सच है आने वाला समय अच्छा होना चाहिए ... अनुपमा जी ...आपको और परिवार में सभी को नव वर्ष मंगलमय हो ...
बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!
बीता हुआ वर्ष आशीष दे जाये -
ये बात बहुत अच्छी लगी .
ये भाव बहुत अच्छे जगे .
शुभकामनाएं
सार्थक प्रस्तुति...
बहुत अच्च्त्त रचना |बधाई |
नव वर्ष शुभ और मंगलमय हो |
आशा
bahut hi salike se likhi ek sundar kavita.nice post anupamaji thanks with regards
bahut sunder prastuti
kabhi yaha bhi aaye
www.deepti09sharma.blogspot.com
is bar mere blog par
"main"
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