नव प्रभात सुखद रहे!

तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!

एक सुबह का आगमन
एक संध्या की विदाई
वही पुराना सिलसिला
चक्रवत चलता रहता है!

सदियों के इस मेले में
एक वर्ष की क्या बिसात
प्रचंड अग्नि की लपटों में
जीवन जलता रहता है!

समय जो बीत रहा है
वह लौट नहीं पाएगा
अंत आखिर होना ही है
दिन ढ़लता रहता है!

बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!

26 टिप्पणियाँ:

Kailash Sharma 31 दिसंबर 2010 को 10:47 am बजे  

समय जो बीत रहा है
वह लौट नहीं पाएगा
अंत आखिर होना ही है
दिन ढ़लता रहता है!

बहुत सार्थक प्रस्तुति.नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

उपेन्द्र नाथ 31 दिसंबर 2010 को 10:54 am बजे  

सुंदर प्रस्तुति......नूतन वर्ष २०११ की आप को हार्दिक शुभकामनाये.

Yashwant R. B. Mathur 31 दिसंबर 2010 को 11:07 am बजे  

"...तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!...."

बिलकुल! आप की बात शतशः सच है.वक़्त नहीं बदलता!

आप को सपरिवार नववर्ष २०११ की हार्दिक शुभ कामनाएं

सादर

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " 31 दिसंबर 2010 को 11:38 am बजे  

nav varsh ki hardik shubhkamnayen!

ज्ञानचंद मर्मज्ञ 31 दिसंबर 2010 को 11:43 am बजे  

अनुपमा जी,
"बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!
सुन्दर अभिव्यक्ति !"
आपको सपरिवार नूतन वर्ष की अनंत मंगलकामनाएं !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

Sunil Kumar 31 दिसंबर 2010 को 1:00 pm बजे  

.तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!...."

बिलकुल सच है.वक़्त नहीं बदलता!

आप को सपरिवार नववर्ष २०११ की हार्दिक शुभ कामनाएं

Dorothy 31 दिसंबर 2010 को 1:08 pm बजे  

सार्थक खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को भी सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.

महेन्‍द्र वर्मा 31 दिसंबर 2010 को 1:19 pm बजे  

anupama ji,
bahut hi sundar kavita likhi hai aapne

नव वर्ष 2011
आपके एवं आपके परिवार के लिए
सुखकर, समृद्धिशाली एवं
मंगलकारी हो...
।।शुभकामनाएं।।

निवेदिता श्रीवास्तव 31 दिसंबर 2010 को 1:22 pm बजे  

नव प्रभात सुखद रहे
नव वर्ष मंगलमय हो .....

सहज समाधि आश्रम 1 जनवरी 2011 को 2:47 am बजे  

आपको नववर्ष 2011 मंगलमय हो ।
एक बेहतरीन रचना ।
काबिले तारीफ़ शव्द संयोजन ।
बेहतरीन अनूठी कल्पना भावाव्यक्ति ।
सुन्दर भावाव्यक्ति । साधुवाद ।
satguru-satykikhoj.blogspot.com

Kunwar Kusumesh 1 जनवरी 2011 को 10:42 am बजे  

नव प्रभात, नव वर्ष सब सुखद हो , यही कामना है.

Anita 1 जनवरी 2011 को 11:08 am बजे  

सुंदर भावयुक्त कविता ! नव वर्ष सुखद हो यह कामना सभी करेंगे तो असर होकर रहेगा !

वन्दना अवस्थी दुबे 1 जनवरी 2011 को 11:23 am बजे  

नये वर्ष की अनन्त-असीम शुभकामनाएं.

mridula pradhan 2 जनवरी 2011 को 8:13 am बजे  

bahut achcha likhi hain.

अभिषेक मिश्र 2 जनवरी 2011 को 10:56 am बजे  

बीते वर्ष की आशीष के साथ हम सभी नववर्ष की ओर बढ़ें, शुभकामनाएँ.

महेन्‍द्र वर्मा 2 जनवरी 2011 को 3:31 pm बजे  

सदियों के इस मेले में
एक वर्ष की क्या बिसात
प्रचंड अग्नि की लपटों में
जीवन जलता रहता है!

सचमुच, एक वर्ष की क्या बिसात...
सच्चाई का सुंदर वर्णन किया है आपने अपनी इस उत्तम रचना में।

केवल राम 3 जनवरी 2011 को 3:11 am बजे  

सदियों के इस मेले में
एक वर्ष की क्या बिसात
प्रचंड अग्नि की लपटों में
जीवन जलता रहता है!
xxxxxxxxxxxxxxxxxx
बहुत अर्थ पूर्ण पंक्तियाँ
आपकी कविता के प्रत्येक शब्द में गहरा अर्थ छुपा है ,,इस अर्थपूर्ण कविता के लिए आपको बहुत बहुत बधाई

केवल राम 3 जनवरी 2011 को 3:12 am बजे  

आपको भी नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें..देर से पहुँचने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ
आशा है यह नव वर्ष आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लेकर आएगा ..शुक्रिया ..मेरे ब्लॉग पर आने के लिए

Rajiv 3 जनवरी 2011 को 3:20 pm बजे  

"...तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!...."
अनुपमा जी, सही कहा आपने आज की भेड़-चाल दुनियां में तारीखें तो बदल जाती हैं मगर सोच वहीँ की वहीँ रह जाती है.ऐसा इसलिए है क्योंकि तारीखें तो हमारी बनाई हुई हैं .वक्त अपने हिसाब से चलता है ,इसलिए इसके बदलने में सदियाँ गुजर जाती है.बेहद सुंदर प्रस्तुति.

abhi 4 जनवरी 2011 को 4:50 am बजे  

सही बात है, तारीखें बदल जाती हैं, वक्त कहाँ बदलता नया साल आने में या पुराने साल के जाने में..
नव वर्ष आपके लिए भी सुखद रहे..

दिगम्बर नासवा 4 जनवरी 2011 को 10:16 am बजे  

बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!

बहुत खूब ... सच है आने वाला समय अच्छा होना चाहिए ... अनुपमा जी ...आपको और परिवार में सभी को नव वर्ष मंगलमय हो ...

Anupama Tripathi 4 जनवरी 2011 को 5:19 pm बजे  

बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!

बीता हुआ वर्ष आशीष दे जाये -
ये बात बहुत अच्छी लगी .
ये भाव बहुत अच्छे जगे .
शुभकामनाएं

स्वाति 6 जनवरी 2011 को 12:23 pm बजे  

सार्थक प्रस्तुति...

Asha Lata Saxena 6 जनवरी 2011 को 12:40 pm बजे  

बहुत अच्च्त्त रचना |बधाई |
नव वर्ष शुभ और मंगलमय हो |
आशा

जयकृष्ण राय तुषार 7 जनवरी 2011 को 2:49 am बजे  

bahut hi salike se likhi ek sundar kavita.nice post anupamaji thanks with regards

deepti sharma 9 जनवरी 2011 को 10:55 am बजे  

bahut sunder prastuti

kabhi yaha bhi aaye
www.deepti09sharma.blogspot.com

is bar mere blog par
"main"

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