अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

एक किरण!

चुपचाप
थाह रहे थे हम
क्या कहता है तम
इस निस्तब्धता में
क्या रहस्य
खोज पायेंगे हम!

तभी
अँधेरा हुआ कम
कुछ वाचाल हुआ तम
और सहज ही कह चला
सकल प्रश्नों का हल है
एक किरण!

किरण-
जिसका मात्र आगमन
तोड़े अन्धकार का भरम
आबद्ध हो जाये श्रृंखला
प्रमुदित हो
झूमे सकल चमन!

किरण-
जो अंक में समेट ले तम
सुनहरा करे वातावरण
और समा जाए अंतस में
तो बन जाएँ स्वयं
किरण के वाहक हम!

ऐसे ही
बनें प्रकाशपुंज हम
लिए झोली में औरों के भी गम
और गतिमान रहे जीवन
फिर रहस्य
खोज लायेंगे हम!

34 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" 29 दिसंबर 2010 को 4:41 pm  

ऐसे ही
बनें प्रकाशपुंज हम
लिए झोली में औरों के भी गम
और गतिमान रहे जीवन
फिर रहस्य
खोज लायेंगे हम!
--
सुन्दर कामना के साथ-
यह प्रेरणा देती हुई रचना बहुत बढ़िया रही!

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 29 दिसंबर 2010 को 4:53 pm  

बहुत खुबसूरत अनुपमा जी.... आशा कि एक किरण सब कुछ या बहुत कुछ बदल देती है...

mahendra verma 29 दिसंबर 2010 को 4:56 pm  

ऐसे ही
बनें प्रकाशपुंज हम
लिए झोली में औरों के भी गम
और गतिमान रहे जीवन
फिर रहस्य
खोज लायेंगे हम!

वाह...अत्यंत खूबसूरत कविता।
उत्साह और प्रेरणा का संचार करने वाली कविता प्रस्तुत करने के लिए बधाई।

अरुण चन्द्र रॉय 29 दिसंबर 2010 को 5:32 pm  

अत्यंत खूबसूरत कविता।

anupama's sukrity ! 29 दिसंबर 2010 को 5:53 pm  

किरण-
जो अंक में समेट ले तम
सुनहरा करे वातावरण
और समा जाए अंतस में
तो बन जाएँ स्वयं
किरण के वाहक हम!


बहुत ही सुंदर कविता -
बधाई -

Dr. Ashok palmist blog 29 दिसंबर 2010 को 6:00 pm  

शानदार विचारोँ की अभिव्यक्ति । आपकी कविताएँ मन मोहने वाली होती हैँ ।
आभार अनुपमा जी !

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Travel Trade Service 29 दिसंबर 2010 को 6:21 pm  

वाह इस रहस्यमय प्रकृति ने भी इंसानी जीवन में कई कई बातों का समागमन किया है जीवन को सकारत्मक विचारों के लिए पर ..इंसानी फितरत को इन्सान ही न माझ पा रहा है प्रकृति चाहती है हम और मंजें और निखरें...जो उसकी चीजें दी हुई है उसका पूरा उपयोग करें पर इन्सान अंधकार की और ...प्रकृति का आप के सब्दों में एक फिर से सकारत्मक संकेत प्रकाश पुन्झ या किरण का ....अच्छा प्रयास आप का अनु जी

Kunwar Kusumesh 30 दिसंबर 2010 को 3:35 am  

चुपचाप
थाह रहे थे हम
क्या कहता है तम
इस निस्तब्धता में
क्या रहस्य
खोज पायेंगे हम!

सुन्दर अभिव्यक्ति

अरविन्द जांगिड 30 दिसंबर 2010 को 3:47 am  

रहस्य खोज ही लिए जाते रहे हैं..........खोज ही लेंगे..

सुन्दर कविता ! साधुवाद.
-------------------------------------------
नव वर्ष आपके लिए मंगलमय हो, हार्दिक सुभकामनाएँ.
अरविन्द जांगीड,
सीकर (राज.)
-------------------------------------------

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι 30 दिसंबर 2010 को 4:25 am  

किरण, जिसकी मात्र आगमन तोड़े अंधकार का भरम।
अच्छी अभिव्यक्ति। ( आपने "किरण जिसका मात्र आगमन" लिखा है जिसमें व्याकरण दोष लिंग) परिलक्छित हो रहा है , देख लें।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" 30 दिसंबर 2010 को 4:44 am  

anupama ji,
shukriyaa aapka ki aap is naacheez ke blog par aaye aur apni mahattavpoorn tippani di...
aapki rachna ko padh ke laga ki waakai mein aaj us kiran ki zarurat hai jo tam ke andhere se door le jaaye!!
hindi ke shabdon ka bahut sundar upyog kiya hai aapne!

नया सवेरा 30 दिसंबर 2010 को 5:32 am  

... umdaa !!!

shekhar suman 30 दिसंबर 2010 को 5:35 am  

बहुत ही सुन्दर अनुपमा जी...
समय के अभाव में टिपण्णी नहीं कर पा रहा था...
हालाँकि इन दिनों आपकी काफी कवितायें पढ़ीं...
सब बेहतरीन...:) लिखती रहें...

रूप 30 दिसंबर 2010 को 6:43 am  

Bahut sundar rachnayen hain apki. Badhai. Mere blog par bhi tashreef layen.

संगीता स्वरुप ( गीत ) 30 दिसंबर 2010 को 8:11 am  

खूबसूरत किरण .....नव वर्ष की शुभकामनायें

यशवन्त माथुर 30 दिसंबर 2010 को 8:13 am  

एक किरण कितना कुछ कर सकती है.
बेहद प्रभावशाली कविता.

सादर

Anita 30 दिसंबर 2010 को 9:55 am  

बहुत सुंदर भाव!

Kailash C Sharma 30 दिसंबर 2010 को 10:10 am  

ऐसे ही
बनें प्रकाशपुंज हम
लिए झोली में औरों के भी गम
और गतिमान रहे जीवन
फिर रहस्य
खोज लायेंगे हम!

बहुत प्रेरक भावपूर्ण रचना. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " 30 दिसंबर 2010 को 1:10 pm  

asha aur prakash ki ek kiran jeevan ko prakash de pane me saksham hoti hai.
naye saal ki hardik shubhkamna.

अनुपमा पाठक 30 दिसंबर 2010 को 1:50 pm  

@ѕαηנαу ∂αηι जी,
आगमन के साथ 'जिसका' ही उपयुक्त है!
धन्यवाद!

सुनीता 30 दिसंबर 2010 को 2:29 pm  

ऐसे ही
बनें प्रकाशपुंज हम
लिए झोली में औरों के भी गम
और गतिमान रहे जीवन
फिर रहस्य
खोज लायेंगे हम!
बहुत सुन्दर ,, आशावादी कविता ,, धन्यवाद

सुनीता 30 दिसंबर 2010 को 2:35 pm  

ऐसे ही
बनें प्रकाशपुंज हम
लिए झोली में औरों के भी गम
और गतिमान रहे जीवन
फिर रहस्य
खोज लायेंगे हम!
बहुत सुन्दर ,, आशावादी कविता ,, धन्यवाद

VIJAY KUMAR VERMA 30 दिसंबर 2010 को 3:39 pm  

सुन्दर रचना
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

mridula pradhan 30 दिसंबर 2010 को 5:57 pm  

bahut achchi lagi.

अल्पना वर्मा 30 दिसंबर 2010 को 6:56 pm  

बहुत सुन्दर आशावादी रचना है.
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

ashish 31 दिसंबर 2010 को 6:39 am  

सुन्दर और प्रभावशाली रचना .. नव वर्ष की हार्दिक सुभकामनाये .

सुशील बाकलीवाल 31 दिसंबर 2010 को 5:05 pm  

2011 का आगामी नूतन वर्ष आपके लिये शुभ और मंगलमय हो,
हार्दिक शुभकामनाओं सहित...

जयकृष्ण राय तुषार 2 जनवरी 2011 को 5:43 pm  

nav varsh ki aseem shubhkamnayen.sundar kavita badhai withregards

सतीश सक्सेना 4 जनवरी 2011 को 3:39 am  

बहुत सरल और सुन्दर लिखती हो ....
शुभकामनायें !

दिगम्बर नासवा 4 जनवरी 2011 को 10:15 am  

आमीन ... सुंदर रचना है ... प्रकाश की जीत तो निश्चित ही है ...
आशावादी रचना ...

Vijai Mathur 4 जनवरी 2011 को 3:24 pm  

वर्ष २०११ आपको एवं आपके सभी परिजनों को मंगलमय ,सुखद तथा उन्नत्तिकारक हो.
अच्छे भावों को इस कविता में प्रस्तुत किया है.

नीरज गोस्वामी 5 जनवरी 2011 को 6:30 am  

अनुपमा जी इस सार गर्भित रचना के लिए बधाई स्वीकार करें...

नीरज

Nilesh Shukla 5 जनवरी 2011 को 8:40 am  

Bahot hi acchi rachna he Anupama ji.. Congrats for this wonderful post and Happy new year 2011

Thanks,
Nilesh Shukla

Vaanbhatt 11 अगस्त 2013 को 5:36 pm  

अन्धकार का हल है...एक किरण...बहुत खूब...

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