एक पुरानी कविता का यूँ याद आ जाना... कभी कहीं खो जाने के बाद... कुछ याद था... कुछ पुनः लिखा... इससे पहले कि फिर खो जाये... सहेज लें!
किसी जन्म का सम्बन्ध रहा होगा
तभी तो वह इतना अपना लगा!
रिश्तों की परिभाषा जाने क्या होती है
मेरे लिए आज है वह सगे से भी अधिक सगा!!
एक मामूली सी पहचान ऐसे भी अर्थ दे सकती है
सोच कर यह विस्मित होता है मन!
बड़ी प्रेरक सी महक है...
जरूर तुम्हें छू कर आ रहा है यह पवन!!
सब ओर होती ऐसी ही
मनोरम छवियाँ... काश!
खून के रिश्तों से कहीं उज्जवल होता है कभी कभी
स्वार्थरहित रिश्तों का आकाश!!
जब दूरी का एहसास हो
तो एक ही गगन के नीचे होने का ख्याल छू जाये!
तुम्हारा कष्ट मेरी आँखों से बहे...
मेरा दर्द तुम्हें रुलाये!!
इस गरिमा की छाँव में
क्या कुछ नहीं जिया जा सकता है!
मेरी आँखों में
एक बेतुका सा सपना बसा रहता है!!
आओ चलो उस सपने की बात करें
तर्क वितर्क को किनारे कर!
ये हो जाये फिर शेष नहीं कुछ
निश्चिंत हो जा सारे कष्ट हमारे हवाले कर!!
ये हम तुम्हारे लिए नहीं
अपने लिए कर रहे हैं!
अपनी नन्ही अंजुरियों में
स्नेहिल किरणें भर रहे हैं!!
किसी जन्म का सम्बन्ध रहा होगा
तभी तो वह इतना अपना लगा!
रिश्तों की परिभाषा जाने क्या होती है
मेरे लिए आज है वह सगे से भी अधिक सगा!!

22 टिप्पणियाँ:
behad sundar rachna... kitna kuch keh jaati hai aise rachnaaye..Maanviy bhavnaon aur rishto kee parton ko kholti jaha koi ankahaa rishta bhi apno se jyada khaas apna hota hai... Anupama ji badhai ..is sundar rachna ke liye
जब दूरी का एहसास हो
तो एक ही गगन के नीचे होने का ख्याल छू जाये!
तुम्हारा कष्ट मेरी आँखों से बहे...
मेरा दर्द तुम्हें रुलाये!!
दिल को छूने वाली रचना..रिश्तों की सही परिभाषा!
बहुत अच्छा किया अनुपमा जी ,जो सहेजा इस कविता को...वरना इतनी प्यारी रचना पढ़ने से वंचित रह जाते हम.
जब दूरी का एहसास हो
तो एक ही गगन के नीचे होने का ख्याल छू जाये!
तुम्हारा कष्ट मेरी आँखों से बहे...
मेरा दर्द तुम्हें रुलाये!!
बहुत सुन्दर...
सुंदर रचना।
गहरी अभिव्यक्ति।
आपकी कविताएं एक अनोखा संसार रचती है जैसे आपके ब्लाग में बना पेड़ और उड़ान भरते पंछी। धरती से एक पवित्र रिश्ता जोड़ती है आपकी कविता। उड़ान भरते पंछियों की तरह
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...वाह!
यही रिश्ता सबसे बड़ा है। आपको नए साल की हार्दिक शुभकामनायें!
बड़ी प्रेरक सी महक है...
जरूर तुम्हें छू कर आ रहा है यह पवन!!
बहुत सुन्दर भाव... खूबसूरत कविता...
सादर...
जन्म के सम्बन्ध भी कई बार इन स्वार्थरहित रिश्तों के आगे बौने हो जाते हैं ...
वही समझते हैं जो इन्हें जीते हैं !
खूबसूरत अभिव्यक्ति !
तुम्हारा कष्ट मेरी आँखों से बहे...
मेरा दर्द तुम्हें रुलाये!!
rishton kee intaah !
nice ,very nice
haardik shubhkaanaayein
प्रेम की गहराइयों को छू कर आती पंक्तियाँ ! बहुत कोमल अहसास !
hmmm satya vachan..sundar kavita...
देखिये पुरानी कविता का याद आ जाना कितना अच्छा हुआ..आपने सहेज भी लिया, हमने पढ़ भी लिया...
बहुत सुन्दर कविता..खास कर ये बात तो बहुत सच है की -
"खून के रिश्तों से कहीं उज्जवल होता है कभी कभी
स्वार्थरहित रिश्तों का आकाश!!"
बहुत ही बढ़िया।
सादर
वाह ...बहुत ही बढि़या ।
बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........
सान्द्र गहन अनुभूति की रचना .कोई अपना सा लगे तो है आज ....नव वर्ष मुबारक .
रिश्तों के आकाश में कुछ रिश्ते तारों के समान चमकते दीखते हैं ...
सब ओर होती ऐसी ही
मनोरम छवियाँ... काश!
खून के रिश्तों से कहीं उज्जवल होता है कभी कभी
स्वार्थरहित रिश्तों का आकाश!!
kyaa baat hai ,sunder ahsaas.. arthpurn kwita hai .aap kaa aabhaar.
जब दूरी का एहसास हो
तो एक ही गगन के नीचे होने का ख्याल छू जाये!
तुम्हारा कष्ट मेरी आँखों से बहे...
मेरा दर्द तुम्हें रुलाये!!
.....
प्रणम्य हैं ये भाव !
पुरानी कविता का याद आ जाना कितना अच्छा हुआ..आपने सहेज भी लिया, हमने पढ़ भी लिया...
संभाल कर रखियेगा , ये धरोहर होती है.... !!
एक मामूली सी पहचान ऐसे भी अर्थ दे सकती है
सोच कर यह विस्मित होता है मन!
जब दूरी का एहसास हो
तो एक ही गगन के नीचे होने का ख्याल छू जाये!
तुम्हारा कष्ट मेरी आँखों से बहे...
मेरा दर्द तुम्हें रुलाये!!
ये हम तुम्हारे लिए नहीं
अपने लिए कर रहे हैं!
अपनी नन्ही अंजुरियों में
स्नेहिल किरणें भर रहे हैं!!
अनुशील... सार्थक नाम... नमन... !!
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