पीड़ा का विस्तार
कितना छोटा है संसार
सत्य झांक रहा है सितारों के बीच से
चल रहा था, चल रहा है झूठ का व्यापार
नाव की पतवार
संबल है मझधार
जीवन की दुर्गम सुगम राहों पर
होती रहती है, प्रभु की महिमा साकार
जीत हो या हो हार
जगमगाता रहे सौहार्द प्यार
खुली हुई बाहों से सबका स्वागात हो
जीवन मुट्ठी भर रेत नहीं, है वह गगन का विस्तार
जुड़े रहें तार
हो जायेगी नदिया पार
भवसागर के सारे ताप झेल कर
धवल परिपक्व, हो जाएगा मन संसार
जीवन का सार
नयनों से बहती धार
हो भजन के स्वर में सराबोर
न रहे अलौकिक आनंद का पारावार
जीवन के दिन चार
क्यूँ करें किसी अनागत का इंतज़ार
बस पल पल को मन से जीते चले जाएँ
आंसू हो या मुस्कान, दोनों के लिए सहर्ष खोल दिया द्वार
जीवन मुट्ठी भर रेत नहीं, है वह गगन का विस्तार!
प्रस्तुतकर्ता
अनुपमा पाठक
at
11 जनवरी 2012

16 टिप्पणियाँ:
जिन्दगी के दिन चार
क्यूँ करें किसी अनागत का इंतजार
बस पल पल को मन से जीते चले जाएँ
आंसू हो या मुस्कान,दोनों के लिए सहर्ष खोल दिया द्वार
गहरी और लाजवाब रचना......
कितनी सुन्दर रचना..!!!
kalamdaan.blogspot.com
. जीवन के दिन चार
क्यूँ करें किसी अनागत का इंतज़ार
बस पल पल को मन से जीते चले जाएँ
आंसू हो या मुस्कान, दोनों के लिए सहर्ष खोल दिया द्वार
वाह....क्या खूब कहा, लाजवाब प्रस्तुति
वाह अनुपमा जी...
बड़ा सुखद संदेसा दे रही है आपकी रचना..
सादर.
जीवन के दिन चार
क्यूँ करें किसी अनागत का इंतज़ार
बस पल पल को मन से जीते चले जाएँ
आंसू हो या मुस्कान, दोनों के लिए सहर्ष खोल दिया द्वार
जो आया ही हुआ है उसका इंतजार भी की क्या करना...तो वर्तमान को ही जीना है सुंदर संदेश देती रचना!
भाई-चारे का सुंदर संदेश ...
दूर-दूर तक पहुचें!
शुभकामनाएँ!
सुंदर संदेश ... सुन्दर रचना..!!!
बहुत अच्छी प्रस्तुति!
अच्छी रचना
बहुत सुंदर
बस पल पल को मन से जीते चले जाएँ
आंसू हो या मुस्कान, दोनों के लिए सहर्ष खोल दिया द्वार
बेहतरीन पंक्तियाँ हैं।
सादर
khol diye hein dwar
mann aangan jhankar
Sagar kay agosh mei kar
yah jeevan sansar
Very nice Anupama, excellent poem.
जीवन के दिन चार
क्यूँ करें किसी अनागत का इंतज़ार
बस पल पल को मन से जीते चले जाएँ
आंसू हो या मुस्कान, दोनों के लिए सहर्ष खोल दिया द्वार
बहुत ही अच्छी सोच.... हमेशा ऐसा ही रहे..... !!
सुन्दर भावप्रणव रचना।
लोहड़ी की बधाई और शुभकामनाएँ!
bahut sundar bhaavna pradhaan rachna.shubhkamnayen.
बेहतरीन रचना ...बधाई स्वीकार करने
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