कुछ प्रश्नोत्तर स्वयं से...!

वैसे तो
कविता और आशा का
गहरा रिश्ता है
बात निराशा से शरू हो सकती है
पर आशा की किरण अंत में
अवश्य जगमगाती है!

कविता और ख़ुशी भी
पर्याय हो सकते हैं
पर
ऐसा क्यूँ है...,
दुःख की रागिनी ही
कविता में अक्सर गाती है?

बिखरे हैं गगन में इतने तारे
कैसे उन्हें...
दस उँगलियाँ पाए गिन?
ऐसे ही प्रश्नों के बीच
एक और बड़ा स्वाभाविक सा प्रश्न
उठ खड़ा हुआ एक दिन-

क्या कष्ट है तुम्हें
जो कवितायेँ लिखते हो?
ऐसा क्या है जो कह नहीं सकते किसी से
जो कागज़ों से कहते रहते हो?

अब...
क्या दे इसका उत्तर अक्षर
नश्वर जीवन के पोर पोर में
क्या नहीं है समाया आंसू का ही निर्झर?

इस आंसू के निर्झर को
क्यूँ तुम केवल दुःख कहते हो
होने दो बरसातें
क्यूँ ख़ुश होने का
यूँ ढ़ोंग किया करते हो

सुख दुःख केवल
दो पहलु हैं भावों के
तापते हैं किकुड़ते ठण्ड में जो...
हैं ये ताप उन अलावों के

बस संवेदनशील
हो मन
और भाव
हो प्रबल
तो सुख हो या दुःख
बह आएगा आखों से जल

फिर,
कविता कैसे पीछे रह जायेगी
अपना सारा ताम-झाम ले कर
आँगन में अनायास मुस्कुरायेगी

उनमे से ही
कोई एक मुस्कान लेकर
प्रस्तुत कर देना!
जिसमें आदि से अंत तक
केवल खुशियों की ही धूप खिली हो
ऐसी कोई कविता लिख देना!!

17 टिप्पणियाँ:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 30 जनवरी 2012 को 11:16 am बजे  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

संगीता स्वरुप ( गीत ) 30 जनवरी 2012 को 11:45 am बजे  

सुख में भी आंसू आटे हैं और दुःख में भी ..बस बहती है कविता .. सुन्दर प्रस्तुति

रश्मि प्रभा... 30 जनवरी 2012 को 12:10 pm बजे  

कविता और ख़ुशी भी
पर्याय हो सकते हैं
पर ऐसा क्यूँ है
कि
दुःख की रागिनी ही
कविता में अक्सर गाती है?... क्योंकि यह सच तो पहले ही कहा गया कि ' वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान - "

आशा बिष्ट 30 जनवरी 2012 को 12:29 pm बजे  

उनमे से ही
कोई एक मुस्कान लेकर
प्रस्तुत कर देना!
जिसमें आदि से अंत तक
केवल खुशियों की ही धूप खिली हो
ऐसी कोई कविता लिख देना!!

sachmuch aisa hona chahiye..

Chandrasekhar 30 जनवरी 2012 को 12:54 pm बजे  

It is like exploring our inner-self but with a child like attitude. And the fact remains that we don't see a child loosing, do we?
Melancholy overtaken by sweet Melody!
Compliments Anu!

Yashwant R. B. Mathur 30 जनवरी 2012 को 1:03 pm बजे  

बबेहतरीन कविता।


सादर

abhi 30 जनवरी 2012 को 1:10 pm बजे  

मुझे तो पॉजिटिव कविता लगी ये!! :)

वैसे एक बात मैंने महसूस की है की उदास समय में अक्सर कुछ लिखने से, चाहे कविता हो या कुछ नोट्स, मन सही में हल्का होता है..

Nirantar 30 जनवरी 2012 को 1:22 pm बजे  

kisi ko apnee vythaa bataanaa
insaan kee aadat mein shumaar hai
isi liye दुःख की रागिनी ही
कविता में अक्सर गाती है?
achhaa vichaarniy soch

sangita 30 जनवरी 2012 को 2:06 pm बजे  

वैसे एक बात मैंने महसूस की है की उदास समय में अक्सर कुछ लिखने से, चाहे कविता हो या कुछ नोट्स, मन सही में हल्का होता ह|

Anju (Anu) Chaudhary 30 जनवरी 2012 को 3:00 pm बजे  

कविता ...खुद से बोलती हैं जब मन के विचार भाव बन जाते हैं तो

बहुत बढिया लिखा हैं आपने .....

S.N SHUKLA 30 जनवरी 2012 को 3:30 pm बजे  

बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

Kailash Sharma 30 जनवरी 2012 को 4:04 pm बजे  

बस संवेदनशील हो मन
और भाव हो प्रबल
तो सुख हो या दुःख
बह आएगा आखों से जल

....बहुत सच कहा है कि आंसू तो सुख दुःख दोनों में ही साथ निभाते हैं...लेकिन कई बार अवसाद के भाव इतने गहन हो जाते हैं कि उनको कागज पर उतारने को मन विवश हो जाता है. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..

ऋता शेखर 'मधु' 31 जनवरी 2012 को 3:41 am बजे  

दुख मौन होता है इसलिए कागज पर उतर आता है|
कविता सकारात्मक है...

वाणी गीत 31 जनवरी 2012 को 4:44 am बजे  

जिसमे आदि से अंत तक खुशियाँ होंगी
ऐसी कविता लिख देना ....
हम तो भई ऐसी ही लिखते हैं :)

विभा रानी श्रीवास्तव 31 जनवरी 2012 को 4:49 am बजे  

नश्वर जीवन के पोर पोर में
क्या नहीं है समाया आंसू का ही निर्झर?
सुख दुःख केवल ,
दो पहलु हैं , भावों के.... !!
सवाल के जबाब ,सवालों में ही.... ????? अच्छा लगता है.......... !!!!!!!!

Saras 5 अप्रैल 2012 को 4:08 am बजे  

लेकिन सच तो यह है ...की कविता के सोते दुःख में ही अधिक बहते है ... दुःख ही लोगों को भाता है ...क्योंकि कहीं अपना आप उसमें नज़र आता है ...

Onkar 7 अप्रैल 2012 को 12:53 pm बजे  

sundar prastuti

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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