कुछ भूले बिसरे पन्ने: २

कुछ भूले बिसरे पन्ने सहेज ही रहे हैं तो उन पन्नों को उनकी समग्रता में सहेज लिया जाये... यात्रा के पड़ाव के रूप में वे हमेशा प्रिय रहेंगे और समय बीतने के साथ शायद और प्रिय होते जायेंगे! अपने भाव... अपनी आशंकाओं... अपनी आशाओं को जिस तरह लिखा था अपरिचय के उस मोड़ पर वह पढ़ना अच्छा लगा इतने दिनों बाद...; अपरिचय का मोड़ ही तो था वह... इस नये देश से अपरिचित, नयी ज़िन्दगी से बिलकुल अनजान और जिसके साथ यहाँ आये थे वह भी तो तब हमारे लिए अनजान ही था... हम दोनों एक दूसरे के लिए अनजान ही थे... जान पहचान की पहली सीढ़ी पर कदम ही तो रखा था बस!!!

२७ अगस्त २००९ को लिखित पन्ने को भी यहाँ हु बहु लिख डालते हैं... हरे रंग की स्याही फीकी नहीं पड़ी है... हाँ, पहचान के रंग इन दो वर्षों में गहरा अवश्य गए हैं:

वातावरण में जिस तरह की शीतलता है वैसी ही शीतलता लोगों के व्यवहार में भी है; सभी चीज़ें व्यवस्थित... सूचना देने को तत्पर सा माहौल... सबकुछ अनुकूल जान पड़ता है! इन लम्हों को शब्दों में... तस्वीरों में कैद करते हुए आनेवाला समय निश्चित ही बढ़िया गुजरने वाला है, कम से कम आशा तो यही है! सभी अपनों से दूर सारा अपनापन एक दूसरे में तलाशते हुए दो लोग आत्मिक रूप से और करीब आ जायेंगे शायद... कौन जाने ये भी एक सुखद पहलु हो इस प्रवास का... इस वनवास का! फिर वही बात, मन अपने आप को विविध प्रकार तसल्ली देने के कितने बहाने निकाल लेता है न... और करे भी क्यूँ न, इतनी दूर इतना अकेला बैठ वह करे भी तो क्या करे... ऐसे अनर्गल प्रलाप के सिवा...! बकबक करते ही रहते हैं हम और सुशील अपने नाम के ही अनुरूप सुशील और शांत... अब तो यही उम्मीद कर सकते हैं कि समय के साथ ऐसा भी हो कि शब्द मौन में समा जाए और मौन शब्दों से बातें करने लगे; एक बिन्दु पर समानता की पराकाष्ठा हो और वहीं दूसरी ओर विविधता का सौन्दर्य भी कायम रहे; दो बिंदु एक दूसरे के पूरक बनकर रहे बिना किसी आपसी प्रतिस्पर्धा के... तभी तो रिश्ते की नींव मज़बूत होती है... सम्बन्ध पुष्पित पल्लवित होते हैं! इस छोटी सी दुनिया की बड़ी बड़ी समस्याएं आपसी तालमेल से ही तो हल होती हैं...; जो हो, जीवन तो चलता ही रहता है, कहानी में मोड़ आते जाते रहते हैं पर गति नहीं रूकती क्यूंकि यात्रा तो अंतहीन है...! जीवन यात्रा में कितनी ही यात्राएं करते हैं हम और हमारी कितनी ही जीवन यात्राएं उस आकाशगंगा में चल रही अनंत यात्राओं का हिस्सा ही तो है...! ऐसे वृहद् सन्दर्भ में सोचें तो धरती के एक भाग से किसी और भाग तक की यात्रा उतनी बड़ी और भयानक भी नहीं कि नये स्थान पर पहुँच कर सहज न हुआ जा सके और वह भी तब जब अकेले नहीं आये हैं... सुशील हैं साथ! इससे ज्यादा विदेश तो शुरू शुरू में वाराणसी था हमारे लिए जब २००१ में वहां पढ़ने गए थे... जमशेदपुर लौट आने की बेचैनी में ही पूरा साल बिता था... फिर रहना ही पड़ा तो वहाँ भी देखते देखते ६ साल निकल गए...! उससे तो स्थिति आज ठीक ही है... क्यूंकि यहाँ कोई तो साथ आया है या ऐसे कहें तो ज्यादा सही रहेगा कि हम किसी के साथ आये हैं! साथ साथ चलते हुए समझ भी विकसित होगी... बिना कहे बातें संप्रेषित हो जाएँ, वो वक़्त भी आएगा... ज़रूर आएगा, क्यूंकि यात्रा तो अंतहीन है... एक मंज़िल से दूसरे की ओर! आज मंज़िल नज़र आने वाला बिन्दु किसी नयी मंज़िल हेतु पड़ाव मात्र है... यही जीवन की सच्चाई है क्यूंकि गति का दूसरा नाम ही जीवन है!

*****

कुछ और पन्ने हैं उन्हें भी सहेज लेंगे यूँ ही... देखें तो हरे रंग की वह स्याही, जो मेरे घर से मेरे साथ आई थी यहाँ, और क्या क्या कह चुकी है...

*****
आज पुनः जब देख रहे हैं
उन पलों को
एक दूरी से
तो एहसास यह
साथ है
कि
बीत रही है
घड़ियाँ भले
पर मन में अंकित
हर बात है!

किस विधि हम मन को मनाते हैं
कैसे कैसे तर्कों से
मन को बहलाते हैं
आज भी याद हमें वो
विदाई वाली प्रात है
कि
बीत गए वो पल करके हमें विदा
पर हमारे संग आज भी
उस पल के आसुओं की
सौगात है!

घर से विदा हुए तो घर सा ही घर मिला
रे मन! अब दो परिवार तुम्हारे हैं
ये सुन्दर प्रतिफल मिला
कुछ नहीं छिना तेरा,
अरे! ये तो सुन्दर समृद्ध प्रभात है
कि
जहां एक मात-पिता और मिले
और साथ ही अब तो संग तेरे
हर पल
तेरा नाथ है!

*****

मन की गति निराली है... कैसे कैसे तर्क गढ़ कर समझा लेती है खुद को!!!

10 टिप्पणियाँ:

Atul Shrivastava 17 जनवरी 2012 को 7:03 am बजे  

यादें आने वाली जिंदगी का रास्‍ता भी बताती हैं और उसे जीने का सलीका भी‍ सिखाती हैं।

vidya 17 जनवरी 2012 को 7:22 am बजे  

बहुत बहुत सुन्दर...
समय के साथ ऐसा भी हो कि शब्द मौन में समा जाए और मौन शब्दों से बातें करने लगे; एक बिन्दु पर समानता की पराकाष्ठा हो और वहीं दूसरी ओर विविधता का सौन्दर्य भी कायम रहे;

so sweet...
u both are lucky to have eachother in ur lives.
stay blessed!!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) 17 जनवरी 2012 को 8:48 am बजे  

जिंदगी को खूबसूरती से देखने का नजरिया अच्छा लगा .. शुभकामनायें

Maheshwari kaneri 17 जनवरी 2012 को 9:03 am बजे  

बीत गए वो पल करके हमें विदा
पर हमारे संग आज भी
उस पल के आसुओं की
सौगात है!...बहुत खूबसूरत और भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

सदा 17 जनवरी 2012 को 11:07 am बजे  

वाह ...बहुत ही बढि़या

कल 18/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, जिन्‍दगी की बातें ... !

धन्यवाद!

Kailash Sharma 17 जनवरी 2012 को 11:28 am बजे  

सकारात्मक सोच ही जीवन का अवलंबन है...बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति...

Yashwant R. B. Mathur 18 जनवरी 2012 को 6:53 am बजे  

बहुत ही सकारात्मक सोच के साथ आपने लिखा है।
बहुत अच्छा लगा।


सादर

Anita 18 जनवरी 2012 को 7:33 am बजे  

यही उम्मीद कर सकते हैं कि समय के साथ ऐसा भी हो कि शब्द मौन में समा जाए और मौन शब्दों से बातें करने लगे; एक बिन्दु पर समानता की पराकाष्ठा हो और वहीं दूसरी ओर विविधता का सौन्दर्य भी कायम रहे; दो बिंदु एक दूसरे के पूरक बनकर रहे बिना किसी आपसी प्रतिस्पर्धा के... तभी तो रिश्ते की नींव मज़बूत होती है... सम्बन्ध पुष्पित पल्लवित होते हैं! इस छोटी सी दुनिया की बड़ी बड़ी समस्याएं आपसी तालमेल से ही तो हल होती हैं...;

वाह, इतनी छोटी सी उम्र में इतनी समझ है आपको रिश्तों की...बहुत बहुत बधाई!

vikram7 18 जनवरी 2012 को 7:19 pm बजे  

sakaaraatma soch liye bhaavpuurn prastuti.

आनंद 21 जनवरी 2012 को 8:42 am बजे  

अब तो यही उम्मीद कर सकते हैं कि समय के साथ ऐसा भी हो कि शब्द मौन में समा जाए और मौन शब्दों से बातें करने लगे; एक बिन्दु पर समानता की पराकाष्ठा हो और वहीं दूसरी ओर विविधता का सौन्दर्य भी कायम रहे; दो बिंदु एक दूसरे के पूरक बनकर रहे बिना किसी आपसी प्रतिस्पर्धा के... तभी तो रिश्ते की नींव मज़बूत होती है..
...
केवल नमन आपको समानता की पराकाष्ठा और विविधता का सौंदर्य समझने में डूबा हुआ हूँ .

21 जनवरी 2012 8:29 पूर्वाह्न

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ