स्वतंत्रता दिवस :: सत्यनारायण पाण्डेय

Dr.S.N.Pandey


आया  शुभ पंद्रह अगस्त
हुए हम सब उन्मत्त-मस्त !


पर हम सुध-बुध न खो दें
अमर शहीदों को भी, करें याद !


जिनके प्राणों की आहुति
दे गयी हमें यह विभूति !


अब न चलेगी चिर-सुसुप्ति
हमें मिल जुल खोजनी है---
ऐसी युक्ति --
मिल जाए सबको दुःख से मुक्ति !


सभी होवें खुशहाल ,
आगे भी जन्मे नौनिहाल !


था उन्नीस सौ तीस का वह दिन
सम्पूर्ण स्वराज्य का था,
हुआ संकल्प !


संकल्प की दृढ़ता ने दिला दी
आजादी !


पर सात दशक बाद भी--
आजादी बेमानी है !


सब को सुख हो, सबको सुविधा
इस में अब भी है, क्यों दुविधा 


अशिक्षा, रोग, भुखमरी ने आज भी घेरा है...


सभी लें आज के पवित्र दिवस पर--
वैसा ही मन पवित्र कर,
पवित्र संकल्प !


सभी सुखी हों,
सभी यति हों !


व्यवस्था ऐसा बनानी है


बलिदान से मिली स्वतंत्रता -
सुतंत्रता में बदल जाय !


न हम दुःखी रहें,
न कोई दुःखी रह जाय !
हो पंद्रह अगस्त की सच्ची प्रतिष्ठा -
अनेक धर्म, जाति, सम्प्रदाय में
एकता की निष्ठा ।
एकता की निष्ठा ।

1 टिप्पणियाँ:

'एकलव्य' 15 अगस्त 2017 को 5:40 pm बजे  

सुन्दर ! क्रांतिकारी रचना आभार ,"एकलव्य"

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